ऐसा कहा जा रहा था कि महंगाई को काबू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक कर्ज सस्ता करने का रास्ता और मुश्किल कर सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं।
बुधवार को हुई मौद्रिक नीति समीक्षा में कोई बदलाव नहीं किया गया। कर्ज नीति ज्यों की त्यों रखी गई है। इसका मतलब यह हुआ कि रेपो रेट 7.75 फीसदी, रिवर्स रेपो रेट 6.75 फीसदी पर बरकरार रखा गया है।
नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) 4 फीसदी रखा गया है, जबकि एमएसएफ 8.7 फीसदी पर बरकरार है। आशंका जताई जा रही थी कि मध्य तिमाही समीक्षा नीति में रेपो रेट बढ़ाकर बैंकों के लिए पूंजी जुटाना महंगा कर सकता है।
बैंकर्स के अनुसार नवंबर में थोक मूल्य सूचकांक पिछले 14 महीने के उच्चतम स्तर 7.52 फीसदी पर पहुंच गया है। इसी तरह उपभोक्ता मूल्य सूचकांक नौ महीने के उच्चतम स्तर 11.24 फीसदी पर है। ऐसी परिस्थिति में आरबीआई के लिए रेपो रेट बढ़ाने के अलावा कोई चारा नहीं है।
राजन दो बार पहले बढ़ा चुके हैं रेपो रेट
सितंबर में आरबीआई गवर्नर के रूप में पदभार ग्रहण करने वाले रघुराम राजन की प्राथमिकता पूर्व गवर्नर डी. सुब्बाराव की तरह महंगाई ही है।
ऐसे में वह महंगाई को नियंत्रित करने के लिए दो बार रेपो रेट में बढ़ोतरी कर चुके हैं। मौजूदा परिस्थिति में रिकार्ड स्तर पर पहुंची महंगाई को देखते हुए रेपो रेट में बढ़ोतरी की ही संभावना है।