देश में योजना की शुरूआत करने वाले प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की छाप वाले योजना आयोग का बस्ता बांधने के बाद नरेन्द्र मोदी सरकार ने आयोग की पुरानी व्यवस्था को भी बदलने का भी मन बना लिया है। फिलहाल तो यहां सचिव के बदले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) को बिठाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि आयोग के मंझोले एवं निचले पदों के नाम एवं कामकाज की शैली में भी परिवर्तन होगा।
नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में सरकार बनने के बाद ही संकेत आ गया था कि योजना आयोग की परिपाटी खत्म की जाएगी। इसकी औपचारिक घोषणा प्रधानमंत्री ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर कर दी। नववर्ष के दिन छह दशक से भी पुराने योजना आयोग के बदले नीति आयोग बनाने की भी घोषणा हो गई।
इसके एक दिन बाद ही योजना भवन में भारी गहमा गहमी के बीच सूरत बदलने लगी। प्रत्यक्ष तो यह दिखा कि सबसे पहले योजना आयोग की पट्टी को उखाड़ कर वहां नीति आयोग की पट्टी लगा दी गई। भवन के कमरों को भी नए सिरे से संवारा जा रहा है। हालांकि भवन के नाम से अभी तक कोई छेड़-छाड़ नहीं की गई है।
बताया जाता है कि अगले सप्ताह नीति आयोग के उपाध्यक्ष एवं सदस्यों के नाम की घोषणा कर दी जाएगी ताकि आयोग का काम शुरू हो सके। इसके उपाध्यक्ष के लिए प्रख्यात अर्थशास्त्री अरविंद पनगरिया के नाम पर सहमति मिलने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
वित्त मंत्रालय से जुड़े सूत्र का कहना है कि नीति आयोग में ऐसा कुछ नहीं होगा जिससे लोगों के बीच संदेश जाए कि सिर्फ नाम ही बदला है, काम नहीं। तभी तो वहां सचिव के बदले सीईओ का प्रावधान किया जा रहा है। उनके मुताबिक नीति आयोग में बिल्कुल कारपोरेट संस्कृति से कार्य होगा और सीईओ आयोग को वैसे ही चलायेंगे जैसे कि कारपोरेट क्षेत्र में काम होता है। उनके मुताबिक वहां सचिव से निचले पदों को भी कुछ नया नाम दिया जाएगा और उनकी भूमिका बदली हुई होगी।
शुक्रवार की सुबह यूं तो राष्ट्रीय राजधानी में बारिश हो रही थी, लेकिन योजना भवन के सामने काम चल रहा था। वहां बरसों से लगी योजना आयोग की पट्टी को हटा कर नीति आयोग का नाम चस्पां कर दिया गया। इसके बाद लोगों में कौतूहल था कि शायद योजना भवन का नाम भी बदल कर नीति भवन कर दिया जाए लेकिन शाम तक भवन के नाम वाली पट्टी ही लगी थी। नई पट्टी लगाने वाले कर्मचारियों से जब इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि अभी सिर्फ एक ही नाम पट्टिका को बदलने का आदेश मिला है।
योजना आयोग के गलियारों में इस बात की भी फुसफुसाहट शुरू हो गई है कि नीति आयोग के उपाध्यक्ष पद पर प्रख्यात अर्थशास्त्री अरविन्द पनगरिया की नियुक्ति हो सकती है। उल्लेखनीय है कि आयोग में एक उपाध्यक्ष जबकि पांच पूर्ण कालिक सदस्यों का प्रावधान किया गया है। आयोग के प्रशासनिक कामकाज देखने के लिए एक सीईओ का प्रावधान भी है जो कि भारत सरकार में सचिव स्तर के अधिकारी होंगे। इसके अलावा विशेषज्ञों का तो पैनल होगा ही, साथ ही प्रशासनिक कार्य के लिए सचिावालीय कर्मचारियों की भी व्यवस्था होगी।