शारदा समूह जैसी कंपनियां कानून की खामियों का फायदा उठा कर आम लोगों की गाढ़ी कमाई के पैसे उन्हें सब्जबाग दिखा कर हजम कर जा रही हैं और कानून की पेंचगीदियों का सहारा लेकर जालसाज बच निकल रहे हैं।
इस कारण देश के वित्तीय नियामक, जिसमें सेबी, आरबीआई आदि शामिल हैं, वह ऐसी कंपनियों पर सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं। सरकार अब इन कमियों को दूर कर नए कानून लाने पर काम कर रही हैं।
बुधवार को आईसीएसआई के कार्यक्रम में वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि पोंजी स्कीम के तहत धोखाधड़ी करने वाले, इस तरह से काम करते हैं, कि वह कानून की खामियों का फायदा उठाकर बच जाते हैं। ऐसे में सरकार इन कमियों को दूर कर नए कानून लाने की कवायद कर रही है, जिससे कि इस तरह की वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाई जा सके।
वित्त मंत्री के अनुसार देश में कई सारे नियामक होने की वजह से उनके बीच आपस में गैप है। इसका प्रतिकूल असर भी वित्तीय धोखाधड़ी पर लगाम लगाने पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में इस तरह कानून बनाने की जरूरत हैं, जो कि धोखाधड़ी करने वालों को बचने का रास्ता न दे सके। सरकार इस दिशा में कदम उठा रही है।
केंद्र सरकार ने हाल ही में वित्तीय धोखाधड़ी रोकने के लिए सरकार के नियामकों और विभिन्न संस्थाओं के बीच आपसी समन्वय बनाने के लिए अंतर मंत्रालयीय समूह का गठन किया है, जिसमें आरबीआई, वित्त मंत्रालय के अधिकारी , सेबी, कॉरपोरेट अफेयर्स मंत्रालय के अधिकारी शामिल हैं।
कार्यक्रम के दौरान वित्तीय क्षेत्र के सुधारों पर चिदंबरम ने कहा कि इस दिशा में कदम उठाया जा रहा है। पर इसे लागू करने में समय लगेगा। वित्त मंत्री के अनुसार देश में कानूनी स्तर पर बदलाव करना आसान नहीं है। इस प्रक्रिया में समय लगता है। इसके लिए विभिन्न चरणों से गुजरना पड़ता है। ऐसे में इन सब पहलुओं को देखने के बाद ही बदलाव हो सकेगा।
चिदंबरम ने कई सारे नियामकों की वजह से होने वाली परेशानियों पर कहा कि इसमें बदलाव की जरूरत है। फाइनेंशियल सेक्टर लेजिसलेटिव रिफार्म कमीशन ने सरकार को वित्तीय क्षेत्र के लिए केवल दो नियामक बनाने की बात कही है। इसके तहत बैंकिंग क्षेत्र के लिए आरबीआई और दूसरे वित्तीय क्षेत्रों के लिए एक नियामक रखने की सिफारिश की थी। सरकार इन सिफारिशों को लागू करने में 15-20 प्रमुख नियमों में बदलाव की जरूरत पड़ेगी।