हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर और सिक्किम जैसे राज्यों में जल विद्युत (हाइड्रो पावर) का उत्पादन बढ़ाने के लिए मोदी सरकार अप्रैल से नेशनल मिशन ऑन स्माल हाइड्रो (एनएमएसएच) को लांच करने का ब्लूप्रिंट तैयार कर रही है। थर्मल और परमाणु परियोजनाओं के मुकाबले हाइड्रो परियोजना के जरिए बिजली का उत्पादन सस्ता और पर्यावरण अनुकूल होने के चलते सरकार इसे बढ़ावा देना चाहती है।
सरकार का इरादा 28 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट में इसकी घोषणा करना चाहती है। इसलिए इस योजना का पूरा खाका तैयार करने का काम इन दिनों बड़ी तेजी से चल रहा है। मोदी सरकार देश में बिजली की कमी को पूरा करने के लिए सौर ऊर्जा के साथ-साथ हाइड्रो पावर को बढ़ावा देने जा रही है। सरकार की योजना बड़े-बड़े बांधों और पावर प्लांट लगाने के बजाय छोटी-छोटी हाइड्रो पावर परियोजनाएं लगाने की है। सरकार बड़े हाइड्रो प्लांट से इसलिए बचना चाहती है, क्योंकि इससे पर्यावरण पर काफी प्रभाव पड़ता है। इसके अलावा बड़े हाइड्रो प्लांट लगाने से पहाड़ों का रूप-स्वरूप भी बिगड़ता है और बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित भी होना पड़ता है। इसके चलते स्थानीय आबादी को परेशानी का सामना करना पड़ता है और लोग इसका विरोध भी करते हैं।
एनएमएसएच को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने देश में छोटी जलविद्युत परियोजनाओं में कमी आने के कारणों की पड़ताल करने के लिए नेशनल मिशन शुरू किया है। इसके साथ ही सरकार इस क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी और निवेश बढ़ाने पर भी जोर दे रही है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने इसके लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है। इस ड्राफ्ट के मुताबिक एनएमएसएच अगले दो वर्ष में जलविद्युत उत्पादन की क्षमता में 500 मेगावाट की बढ़ोतरी और उसके बाद के तीन वर्षों में इसमें इसे 4,500 मेगावाट और बढ़ाने की योजना है।
जलविद्युत का उत्पादन बढ़ाने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सरकार छोटी जलविद्युत परियोजनाओं की स्थापना के लिए नीतिगत ढांचा तैयार करने पर काम कर रही है। सरकार इस काम में उन सभी सेक्टरों को शामिल करना चाहती है, जो इन परियोजनाओं के पुनरुद्धार, आधुनिकीकरण और उन्नयन में सहायक हो सकते हैं। इसके अलावा सरकार सरकार छोटे और अत्यंत छोटे हाइड्रो पावर प्लांटों के लिए नई तकनीक और इंजीनियरिंग सॉल्यूशन भी विकसित करना चाहती है।
सरकार की योजना एक ठोस रणनीति और वित्तीय पैकेज के साथ एनएमएसएच को लांच करने की है, ताकि इसके तहत सार्वजनिक और निजी-सार्वजनिक साझेदारी (पीपीपी) दोनों ही तरह के मॉडलों के तहत देशभर में छोटे-छोटे प्लांट स्थापित किए जा सकें। इसके लिए रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक की मदद से इस तरह की परियोजनाएं लगाने के लिए उपयुक्त स्थानों की पहचान करने की एमएनआरई की योजना है।