साल 2011-12 में बैंकों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायत कानपुर और नई दिल्ली शहर से आई हैं। कानपुर से जहां 9,713 शिकायतें बैंकों के खिलाफ की गई हैं, वहीं नई दिल्ली से 9,583 शिकायतें दर्ज हुई हैं। भारतीय रिजर्व बैंक की बैंकिंग लोकपाल की 2011-12 की रिपोर्ट के अनुसार बैंकों के खिलाफ 50 फीसदी शिकायतें शहरी और अर्धशहरी क्षेत्रों से आई हैं।
हालांकि पिछले तीन साल में शिकायत करने के तरीकों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। अब भी सबसे ज्यादा शिकायतें पोस्ट या फैक्स के जरिये की गई हैं। बैंकिंग लोकपाल के कार्यालयों में आई शिकायतों में 73 फीसदी शिकायतें पोस्ट या फैक्स के जरिये मिली हैं। वहीं ई-मेल और ऑनलाइन से होने वाली शिकायतों की हिस्सेदारी 13-14 फीसदी ही है।
रिपोर्ट के अनुसार पिछले तीन साल में लगातार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के खिलाफ शिकायतें बढ़ी हैं। वहीं निजी बैंकों और विदेशी बैंकों के खिलाफ शिकायतों में कमी आ रही है। राष्ट्रीयकृत बैंक के खिलाफ शिकायतें साल 2010-11 के 24 फीसदी से बढ़कर 31 फीसदी, भारतीय स्टेट बैंक और उसके सहयोगी बैंकों के खिलाफ शिकायतें इस अवधि में 29 से 35 फीसदी तक पहुंच गई हैं।
जबकि निजी बैंकों के खिलाफ शिकायतें पिछले तीन साल में 28 फीसदी से कम होकर 21 फीसदी तक आ गई हैं। बैंकों के खिलाफ सबसे ज्यादा शिकायतें एटीएम,डेबिट कार्ड और क्रेडिट कार्ड को लेकर ग्राहकों ने की है। कुल शिकायतों में से 21 फीसदी शिकायतें कार्ड आधारित हैं। ग्राहक बैंकों से मिलने वाली सुविधाओं में किसी तरह की परेशानी के खिलाफ बैंकिंग लोकपाल में शिकायत कर सकते हैं। जिसके देश भर में 15 कार्यालय हैं। उत्तर प्रदेश में कानपुर, पंजाब, हरियाणा आदि क्षेत्र के लिए चंडीगढ़ में क्षेत्रीय कार्यालय हैं। आरबीआई की रिपोर्ट के अनुसार साल 2011-12 में बैंकिंग लोकपाल के जरिये 94 फीसदी शिकायतों का निवारण किया गया है।