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रिलायंस पर 6,500 करोड़ रुपए की मनी लांड्रिंग का आरोप

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सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता और आम आदमी पार्टी के नेता प्रशांत भूषण ने रिलायंस इंडस्ट्रीज पर मनी लांड्रिंग का आरोप लगाया है।
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भूषण ने काले धन के मामले की जांच के लिए जस्टिस एमबी शाह की अगुवाई में बने विशेष जांच दल (एसआईटी) को पत्र लिखकर रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसके केजी बेसिन ऑयल एवं गैस ब्लॉक में निवेश से जुड़ी 6,500 करोड़ रुपये की कथित मनी लांड्रिंग के मामले की जांच करने की मांग की है।

एसआईटी के संयुक्त सचिव और सदस्य सचिव एमएल मीणा को लिखे पत्र में भूषण ने आरोप लगाया है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) ने निजी क्षेत्र के आईसीआईसीआई बैंक की मदद से मनी लांड्रिंग को अंजाम दिया है।
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रिलायंस ने इधर का माल किया उधर

उन्होंने कहा कि सीएजी की दो रिपोर्टों के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज ने केजी बेसिन डी6 ब्लॉक से कमाए गए पैसे को निकालकर दूसरी जगह लगाया, गलत तरीके से उत्पादन लागत में बढ़ोतरी की और पूंजीगत व्यय को अधिक दिखाया।

इससे स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि इस पैसे को लांड्रिंग के जरिए दोबारा रिलायंस इंडस्ट्रीज की कंपनियों में लगाया गया। एसआईटी को लिखे पत्र में भूषण ने 31 अगस्त 2011 को सिंगापुर में भारतीय उच्चायुक्त द्वारा लिखे गए चेतावनी पत्र का उल्लेख किया है।

उच्चायुक्त ने लिखा था कि बायोमेट्रिक्स मार्केटिंग लिमिटेड के जरिए भारत में 6,530 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। बायोमेट्रिक्स एक छोटी सी कंपनी है, जिसका सिंगापुर में कोई कारोबार नहीं है।

उच्चायुक्त ने उल्लेख किया था कि इस कंपनी की सिंगापुर में कोई परिसंपत्ति और इक्विटी नहीं है और वह छोटी कंपनी होने का दावा करते हुए सिंगापुर में आयकर रिटर्न फाइल नहीं करती है।

फिर भी इस कंपनी की ओर से 6,530 करोड़ रुपये का भारी भरकम निवेश किया गया, जो भारत में सिंगापुर से किया गया सबसे बड़ा एकल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश है।

कौन तोड़ रहा है कानून?

उच्चायुक्त के पत्र के मुताबिक यह सभी निवेश भारत में रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह की कंपनियों में किए गए हैं। इसमें से सबसे बड़ा हिस्सा रिलायंस गैस ट्रांसपोर्टेशन इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड को गया है, जो व्यक्तिगत रूप से मुकेश अंबानी की 100 फीसदी स्वामित्व वाली कंपनी है।

उन्होंने बताया कि बायोमेट्रिक्स कंपनी का प्रभावकारी स्वामित्व अतुल शांति कुमार दयाल के पास है। दयाल आरआईएल समूह की 32 कंपनियों में निदेशक हैं। अब यह बात सामने आई है कि बायोमेट्रिक्स कंपनी बंद हो गई है।

इससे पूरी तरह साफ है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज केजी बेसिन से गलत तरीके से कमाए गए मुनाफे को सिंगापुर के जरिए वैध बना रही है और इसे अंबानी के खाते में जमा करा रही है।

विगत 27 फरवरी को जब प्रशांत भूषण ने पहली बार यह खुलासे किए थे, तब रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कहा था कि भारतीय कंपनियों में यह निवेश बायोमेट्रिक्स द्वारा किए गए, जिसे आईसीआईसीआई बैंक की सिंगापुर ब्रांच की ओर से लोन के रूप में लिया गया था।
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यूपीए सरकार ने की तीन सालों तक अनदेखी

रिलायंस के इस बयान से ही कई सवाल खड़े होते हैं। मसलन, आईसीआईसीआई बैंक ने एक ऐसी कंपनी को हजारों करोड़ रुपये का लोन दिया, जिसकी कोई संपत्ति, इक्विटी और कारोबार नहीं है।

आईसीआईसीआई बैंक द्वारा इस तरह का भारी-भरकम लोन जारी करने से पहले क्या सिक्युरिटी थी? लोन जारी करने से पहले आईसीआईसीआई बैंक द्वारा क्या कदम उठाए गए?

एसआईटी को लिखे पत्र में भूषण ने यूपीए सरकार पर आरोप लगाया कि उसने करीब तीन सालों तक इन तथ्यों की अनदेखी की। चूंकि, यह मामला रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी इकाइयों से जुड़ा था, शायद इसलिए पिछली सरकार ने मनी लांड्रिंग के इस मामले की जांच कराने की कोई जहमत नहीं उठाई। इसलिए मेरा अनुरोध है कि इस मामले की विस्तृत जांच कराई जाए।
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