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भारत को नंबर वन बनाएंगे 25 'शेर'

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भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेक इन इंडिया के जरिए भारत का संवारने का वायदा किया है। प्रधानमंत्री मोदी के इस वादे को पूरा करने में 25 'शेर' अपनी अहम भूमिका निभाएंगे। ये सभी शेर अपनी-अपनी जगह पर बहुत ही अहम स्थान रखते है।
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इन 25 'शेरों' को नई पहचान मेक इन इंडिया के जरिए ही दी गई है। 25'शेरों' की धूम भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में है। तभी तो दुनिया भर के अमीर देशों की रूचि इन 'शेरो' में जाग चुकी है।

इस स्टोरी में हम आपको रूबरू करवा रहे हैं देश के 25 उन 'शेरों' से जिनके बारे में जानने के बाद इन शेरो को दाद दिए बिना नहीं रह पाएंगे। पढ़िए उन 25 शेरों के बारे में जिनको लेकर अमीर देश हमेशा रहते है उत्साहित।
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ऑटोमोबाइल का बाजार

ऑटोमोबाइल सेक्टर भारत में बहुत तेजी से बढ़ रहा है। वर्ष 2013-14 में 21.5 लाख वाहनों का निर्माण किया गया। वर्ष 2015 तक पूरी दुनिया में वाहनों की संख्या के हिसाब से भारत चौथा सबसे बड़ा मार्केट होगा।

पूरे भारत के अंदर 4 ऑटोमोटिव मैन्युफैक्‍चरिंग हब हैं। भारत की जीडीपी में ऑटामोबाइल सेक्टर 7 फीसदी का योगदान करता है। अगर इसी तेजी से बाजार की मांग रही तो वर्ष 2020 तक हर साल 60 लाख से ऊपर ऑटोमोबाइल की मांग होगी।

भारत में ऑटोमोबाइल सेक्टर की ग्रोथ को देखते हुए यहां आने वाले समय में खूब निवेश होगा। इसके साथ इस सेक्टर में लाखों की संख्या में नौकरियां पैदा होगी।

ऑटोमोबाइल सेक्टर में सुजुकी, निसान, पियाजियो, फॉक्सवेगन, रेनॉ, हुंइई, बीएमडब्लू, फोर्ड, टोएटा जैसी कंपनियां भारत में निवेश कर रही हैं।

ऑटो कंपोनेंट की अनोखी दुनिया

वर्ष 2015 तक भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा स्टील निर्माता हो जाएगा। अभी पूरी दुनिया में भारत का स्‍थान स्टील निर्माण के क्षेत्र में चौथे नंबर पर है। वर्ष 2012-13 तक भारत में इसका कुल कारोबार 39.7 अरब डॉलर था।

वर्ष 2008-2013 के बीच में इसके कारोबार में 17 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वर्ष 2012-13 में भारत ने करीब 9.7 अरब डॉलर के ऑटो कंपोनेट का निर्यात किया गया है।

वर्ष 2021 तक इस सेक्टर के 115 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंचने की उम्मीद है। साल 2016 तक पूरी दुनिया में भारत इस क्षेत्र में तीसरे नंबर पर पहुंच जाएगा।

वर्ष 2020 तक चीन, जापान और अमेरिका के बाद इस सेक्टर मे चौथे नंबर पर भारत पहुंच जाएगा। इस सेक्टर में दुनिया के सात बड़े देश भारत के निवेश कर रहे हैं। इन देशों में जर्मनी, ब्रिटेन, जापान, इटली, फ्रांस, अमेरिका, कनाडा शामिल हैं।

जब सब करेंगे हवाई जहाज का सफर

‌उड्डयन क्षेत्र में भारत में दुनिया में 9वें नंबर पर है। वर्ष 2013 तक भारत में हवाई यात्राएं करने वाले यात्रियों की संख्या 1.63 करोड़ ‌थी। आंकड़ो के मुताबिक भारत में 2017 तक 60 लाख अंतर्राष्ट्रीय हवाई यात्री होंगे।

भारत का 40 से भी ज्यादा देशों की 85 एयरलाइंस से जुड़ने वाला नेटवर्क है। दुनिया भर में वर्ष 2020 तक हवाई क्षेत्र में तीसरे नंबर पर पहुंच चुका होगा। भारत का हवाई बेड़ा वर्ष 2020 तक बढ़कर 800 एयरक्रॉफ्ट का हो जाएगा।

वर्ष 2030 तक भारत में 250 एयरपोर्ट का नेटवर्क बनाए जाने की योजना है। इन हवाई अड्डो से लोग हवाई सफर कर सकेंगे। इस सेक्टर में एयरबस, बोइंग इंटरनेशनल कॉरपोरशेन, एयर एशिया, रॉल्स रॉयस, फ्रैंकफर्ट एयरपोर्ट वर्ल्डवाइड, हनीवेल एयरोस्पेस, मलेशिया एयरपोर्ट्स, होल्डिंग, जीई एविऐशन जैसी कंपनियां निवेश कर रही हैं। अभी इस सेक्टर में सात विदेशी कंपनियां निवेश कर रही हैं।

बॉयोटेक्‍नोलॉजी होगी भारत की नई पहचान

पूरे एशिया क्षेत्र में तीसरी सबसे बड़ी बॉयोटेक इंडस्ट्री भारत में ही है। यूएसएफडीए की मंजूरी मिलने के बाद दूसरे नंबर पर सबसे ज्यादा प्लांट यहीं लगाए गए हैं।

वर्ष 2012-17 तक बॉयोटेक्‍नोलॉजी सेक्टर में 3.7 अरब डॉलर खर्च किए जाने की योजना है। हेपेटाइटिस बी वैक्सीन को सबसे ज्यादा भारत में ही बनाया जाता है। वर्ष 2013 तमक बॉयो-इकॉनामी 4.3 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गई है। वर्ष 2025 तक यह इंडस्ट्री 100 अरब डॉलर की हो जाएगी।

अभी इस क्षेत्र में अमेरिका, फ्रांस और सिंगापुर भारत में निवेश कर रहे हैं। इन देशों की सात कंपनियां भारत में बॉयोटेक्‍नोलॉजी क्षेत्र में निवेश कर रही है।

हर केमिकल में होगा भारत का रंग

एशिया में केमिकल निर्माण के क्षेत्र में भारत का तीसरा नंबर है। वैश्विक स्तर एग्रो-केमिकल के निर्माण में भारत को तीसरा स्‍थान प्राप्त है। पूरी दुनिया में केमिकल निर्माण के क्षेत्र में भारत 6वें नबर पर है।

वर्ष 2013-14 भारत में कई तरह के कुल 19,300 मीट्रिक टन केमिकल का निर्माण किया गया। भारत में 70,000 केमिकल उत्पादों का निर्माण किया जाता है।

विश्‍व के कुल डाई उत्पादन का 16 फीसदी डाई उत्पादन सिर्फ भारत में ही होता है। जापान, जर्मनी, नीदरलैंड, स्विटजरलैंड, ब्रिटेन, बेल्जियम, अमेरिका जैसे देशों की 12 कंपनियां इस सेक्‍टर में निवेश कर रही हैं।

बेहतरीन कंस्ट्रक्‍शन से बनेगा मजबूत भारत

वर्ष 2017 तक कंस्ट्रक्‍शन क्षेत्र में 1,000 अरब डॉलर के निवेश होने की संभावना है। अगले 20 सालों में 650 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत इस क्षेत्र में होगी।

इस क्षेत्र में 100 फीसदी एफडीआई की मंजूरी ऑटोमे‌टिक रूट के जर‌िए मिल चुकी है। इसके जरिए टॉउनशिप और शहरों में निवेश किया जाएगा। भारत की जीडीपी में 10 फीसदी योगदान कंस्ट्रक्‍शन क्षेत्र का रहता है।

इस सेक्टर में निवेश और तेजी आने के साथ-साथ सबसे ज्यादा प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरी के अवसर भी बढ़ेगे। इस सेकटर में अमेरिका, फ्रांस, सिंगापुर, नार्वे, यूएई, साइप्रस और जर्मनी जैसी कंपनियां निवेश कर रही हैं।

‌डिफेंस मैन्युफैक्‍चरिंग, घर में ही बनेंगे आधुनिक हथियार

दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी सेना भारत के पास है। थल सेना, नौ सेना और वायुसेना के साथ ही भारत में इस सेक्‍टर में निवेश की बहुत गुजाइंश है। देश के कुल बजट का 40 फीसदी इसी सेक्टर पर खर्च होता है।

थल सेना, नौ सेना और वायुसेना की जरूरतों की 60 फीसदी चीजें बाहर से आयात करके पूरी की जाती है। इस सेक्टर में एफडीआई को मंजूरी मिलने के बाद देश में अगले 7-8 साल में 250 अरब डॉलर का निवेश हो सकता है।

इस सेक्टर में निवेश के लिए बीएई इंडिया सिस्टमस ब्रिटेन, पिलाटस स्विटजरलैंड, लॉकहीड मार्टिन अमेरिका, राफेल इजरायल, एमबीडीए फ्रांस जैसी कंपनियां निवेश कर रही है। यह भारत का विदेशी निवेश का सबसे बड़ा बाजार बन सकता है। भारत में ‌डिफेंस मैन्युफैक्‍चरिंग शुरू होने से देश में ही रोजगार के अवसर इस क्षेत्र में आएंगे।

इलेक्ट्रिकल मशीनरी का बढ़ेगा बाजार

इलेक्ट्रिल मशीनरी का बाजार भारत में वर्ष 2007-12 के बीच में 10.5 फीसदी की तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2013-14 तक कुल 4.9 अरब डॉलर की निर्यात किया गया है।‌ पिछले 8 वर्षों में इस सेक्टर का निर्यात 14.8 फीसदी की दर से बढ़ा है।

वर्ष 2012-13 में इलेक्ट्रिकल मशीनरी का कुल बाजार 24 अरब डॉलर का था। इस सेक्टर में एमएचआई, हिटाची, बेबकॉक, एल्सटॉम, तोशिबा, एनसलेडो, कॉलफैक्स कॉरपोरेशन, लैंगरेंड और जीई जैसी कंपनियां निवेश कर रही हैं।

इस सेक्टर में 8 देशों की 12 बड़ी कंपनियां निवेश कर रही हैं। वर्ष 2022 तक इक्विपमेंट इंडस्ट्री का कारोबार बढ़कर 25-30 अरब डॉलर तक हो सकता है। वहीं ट्रांसमिशन इंडस्ट्री में इसका बाजार बढ़कर 70-75 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच सकता है।

इलेक्ट्रानिक सिस्टम और भारत के ग्राहक

विश्‍व में तीसरे नंबर पर सबसे ज्यादा वैज्ञानिक भारत में हैं। वर्ष 2020 तक कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक का बाजार बढ़कर 29 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच जाएगा। वर्ष 2015 तक इस सेक्टर में 94.2 अरब डॉलर का बाजार तैयार हो सकता है।

वर्ष 2011-15 तक यह बाजार लगातार 9.88 फीसदी की तेजी से बढ़ा है। इस सेक्‍टर में सरकार की तरफ से दो कार्य किए जा रहे हैं। सरकार नेशनल नॉलेज नेटवर्क और नेशनल ऑप्‍टिकल फाइबर नेटवर्क पर काम कर रही है।

इस सेक्टर में सैमसुंग, आईबीएम, एलजी, डेल, जीई, जाबिल, मोटोरोला, लेनोवो, नोकिया, लाइट-ऑन, फॉक्सकॉन, बॉश जैसी कंपनियों ने निवेश किया है। इस सेक्‍टर में दुनिया के आठ देशों की बड़ी कंपनियां भारत मे निवेश कर रही है।

फूड प्रोसेसिंग, अमेरिका को सबसे ज्यादा भाया ये क्षेत्र

देश भर में 19.2 करोड़ हेक्टेअर भूमि पर खेती होती है। वहीं कुल 8.99 करोड़ हेक्टेअर भूमि सिंचाई की जाती है। पूरे देश भर में 127 एग्रो क्लाइमेटिक जोन है। देश भर में 42 मेगाफूड पार्कों का निर्माण किया जाना है।

इस सेक्टर में कुल 98 अरब डॉलर के निवेश की बात कही जा रही है। क्रॉफ्ट, मार्स, नेसले, मैकेन, डानोन, फरेरो, डेल मॉन्टे, काजोम, केलॉग्स, पेप्सी, यूनीलीवर, परफेटी, कारगिल, कोका कोला, हरसे जैसी कंपनियां निवेश कर रही हैं।

फूड प्रोसेसिंग क्षेत्र में अकेले अमेरिका की ही आठ कंपनियों ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इसके बाद स्विटजरलैंड, कनाडा, फ्रांस, इटली, जापान, एंग्लो डच जैसे देश निवेश कर रहे हैं।

आईटी-बीपीएम इंडस्ट्री, अच्छी सैलरी देने में आगे

वर्ष 2014 में भारत को आईटी और बीपीएम इंडस्ट्री से 118 अरब डॉलर का राजस्व प्राप्त हुआ है। पिछले पांच सालों में भारतीय कंपनियों ने 200 अरब डॉलर की कमाई कंपनियों ने की है।

आईटी-बीपीएम के बढ़ते प्रभाव के चलते 78 देशों ने 600 से ज्यादा सेंटर भारत में स्‍थापित हुए हैं। वर्ष 2020 तक यह इंडस्ट्री 225 ‌अरब डॉलर के स्तर को पार कर जाएगी।

आईटी-बीपीएम इंडस्टी में अकेले अमेरिका की 13 कंपनियां निवेश कर चुकी है। एचपी, आईबीएम, माइक्रोसॉफ्ट, सीडीएनएस, इंटेल, डेल इंटरनेशनल, एगीलेंट टेक्‍नोलॉजीस, मेंटॉर ग्रॉफिक्स, ओरेक्ल कॉरेपोरशन, क्वॉलकॉम, टिबको और एप्लाइड मैटेरियलस जैसी कंपनियां शामिल है।

इसके अलावा फिलिप्स, सेप, रिको, स्टेरिया, एटॉस जैसी कंपनियां शामिल है। अब पीएम मोदी को इस सेक्टर में और अधिक निवेश लाने के लिए तेजी दिखानी होगी। इससे सेक्‍टर में लोगों को बड़े स्तर पर अच्छा रोजगार मिल सके।

लेदर इंडस्ट्री, पूरी दुनिया को पहना रहे फुटवियर

भारत में यह लेदर इंडस्ट्री का आकार 11 अरब डॉलर हो गया है। वर्ष 2013-14 में ही भारत ने 6 अरब डॉलर का निर्यात किया। पूरे विश्‍व के कुछ चमड़ा उत्पादन का 10 फीसदी उत्पादन सिर्फ भारत में ही होता है।

चमड़ा उद्योग में अगले 5 सालों में 24 फीसदी की तेजी आने की उम्मीद है। इस सेक्टर में काम कर रहे 55 फीसदी लोगों की आयु 35 वर्ष से भी कम है।

अभी इस सेक्टर में सिर्फ तीन विदेशी कंपनियां ही भारत में निवेश कर रही है। इसमें से अपाचे ग्रुप और फेंग ते शूज कंपनियां ताइवान की हैं। वहीं इटली की एक कंपनी इटाटस निवेश कर रही है।

भारत में करीब 2 अरब फुट चमड़ा उत्पादन होता है। भारत में बड़े स्तर पर चमड़ा उत्पादन का होना एक बड़ी वजह यहां पर कच्‍चे माल की उपलब्‍धतता होना है। विश्‍व की तुलना में भारत में चमड़े से बने उत्पाद काफी सस्ते होते हैं।

मीडिया-एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री

भारत में मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री बहुत तेजी से आगे बढ़ रही है। भारत में सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री का कारोबार बढ़कर 220 अरब डॉलर हो जाएगा। मीडिया और एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री ने वर्ष 2013 में 918 अरब डॉलर का राजस्व कमाया है।

दुनिया भर में टेलीविजन का तीसरा सबसे बड़ा बाजार भारत है। वर्ष 2013 के अनुसार करीब 16.1 करोड़ घरों में टेलीविजन है। देश में एनीमेशन इंडस्ट्री भी बहुत तेजी से बढ़ी है। देश भर में 800 टेलीविजन चैनल है।

भारत में अभी वाल्ट डिजनी, एनबीसी यूनिवर्सल, ओगिलेव एंड मेदर, ब्लैकस्टोन, इंटरप्लबिक ग्रुप, ब्लूमबर्ग, न्यूज कॉर्प, सोनी, लियो बर्नेट, बीबीसी जैसी कंपनियों ने मीडिया और एंटरटेनमेंअ इंडस्ट्री में निवेश किया है।

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में भी अमेरिका की सात कंपनियों ने सबसे ज्यादा निवेश किया है। वहीं ब्रिटेन की दो और अमेरिका की एक कंपनी ने निवेश किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन, जापान और अमेरिका की यात्रा के बाद इस सेक्टर में और ज्यादा निवेश आने की संभावना है। मीडिया इंडस्ट्री जितनी तेजी से बढ़ रही है। इससे सेक्‍टर में अच्छे काम करने वालों की संख्या में बहुत तेजी से बढ़ोतरी होगी।

खनन(माइनिंग): 88 खनिज पदार्थों का उत्पादन

भारत में खनन क्षेत्र में बहुत संभावनाएं हैं। खनिज उत्पादों के मामले में भारत कई देशों से आगे है। पूरी दुनिया में बाक्साइट रिजर्व के मामले में भारत का 6वां स्‍थान है। वहीं आयरन ओर के मामले में भारत विश्‍व में 5वें नंबर पर है।

इतनी बड़ी मात्रा ख्‍ानिज पदार्थों की उपलब्‍धता कई विदेशी कंपनियों को भारत में निवेश करने के लिए उकसाती रहती हैं। भारत में करीब 302 अरब टन कोयला का भंडार उपलब्‍ध है।

देश में थर्मल पॉवर के निर्माण में कोयले का योगदान बहुत है। भारत के अंदर अभी इस क्षेत्र में आस्ट्रेलिया की पांच कंपनियां सबसे ज्यादा निवेश कर रही है। इसके बाद ब्रिटेन, ताइवान, जापान जैसे देश इस सेक्टर में निवेश कर रहे हैं। भारत में विभिन्न प्रकार के 88 खनिज पदार्थों का उत्पादन होता है।

भारत के खनिज पदार्थ पूरी दुनिया की तरफ अपना ध्यान खीचते हैं। बीएचपी बि‌लि‌टन, रियो टिंटो, वेंदाता रिसोर्स, इंडियन रिसोर्स लिमिटेड, जेएफई स्टील कॉरपोरेशन लिमिटेड, आस्ट्रेलियान इंडियन रिसोर्स, चाइना स्टील कॉरपोरेशन, एनएसएल कॉन्सालिडेटेड, कोलर गोल्ड जैसी कंपनियां शामिल हैं।

तेल-गैस क्षेत्र: इस क्षेत्र में बढ़ना है आगे

भारत में तेल और गैस की उपलब्‍धता तो खाड़ी देशों पर निर्भर है। पर इसके बावजूद भारत में 96 ट्रिलियन क्यूबिक फीट शैल गैस रिजर्व है। वहीं नैचुरल गैस रिजर्व 47 ट्रिलियन क्यूबिक फीट उपलब्‍ध है।

तेल की उपलब्‍धता देश में 800 मिलियन मीट्रिक टन तेल का भंडार है। विश्‍व में क्रूड और पेट्रोलियम पदार्थों का उपभोग के मामले में भारत चौथे नंबर पर है। एशिया में ‌ऑयल रिफाइनरी के मामले में दूसरे नंबर पर भारत है। इस सेक्टर में ब्रिटिश पेट्रोलियम, केयर्न एनर्जी, सेल, बीजी ग्रुप और निक्‍को रिसोर्स जैसी कंपनियों ने निवेश कर रखा है।

पीएम मोदी के ‌लिए आने वाले समय में क्रूड और पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्‍धतता को बरकरार रखना एक कड़ी चुनौती होगी। इस क्षेत्र में बड़ा निवेश लाना मोदी के लिए एक चुनौती भरा रास्ता होगा।

फॉर्मास्टुयिकल बाजार: बनेगा एक नया बाजार

पूरी दुनिया में वर्ष 2020 तक दवाओं के बाजार के मामले में भारत तीसरे नंबर होगा। करीब 20 फीसदी जेनेरिक दवाईयों का निर्यात किया जाएगा। वर्ष 2020 तक भारत का फॉर्मास्टुयिकल बाजार 45 अरब डॉलर का राजस्व प्रदान करेगा।

वर्ष 2016 तक इस बाजार के बढ़कर 26.1 अरब डॉलर हो जाने की संभावना है। वर्ष 2024 तक फॉर्मास्टुयिकल सेक्‍टर के इंफ्रास्ट्रक्चर पर 200 अरब डॉलर का ‌निवेश किया जाएगा।

भारत में अमेरिका, इजरायल, ब्रिटेन, जापान और स्वीडन जैसी कंपनियां निवेश कर रही है। पूरे विश्‍व में दवाओं के बाजार में अभी 49 कब्जा अमेरिका का ही है। भारत के अंदर दवाओं का एक बड़ा बाजार उभर रहा है। आने वाले समय में इस सेक्टर में रिसर्च से लेकर मार्केटिंग तक में रोजगार मिलने की बेहतर संभावना है।

बनेगा पोर्ट होगा खूब निर्यात

भारत में वर्ष पोर्ट के विकास को लेकर 2010-14 के बीच में 430 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। अभी भारत में कुल 12 प्रमुख पोर्ट उपलब्‍ध हैं। 87 नए पोर्ट को बनाने की मंजूरी दी जा चुकी है।

73 पोर्ट का ‌निर्माण सार्वजानिक-निजी भागीदारी के तहत किया जाएगा। अभी भारत सभी पोर्ट पर 800 मिलियन मीट्रिक टन कार्गों क्षमता है।

भारत में पोर्ट बनाने के लिए एपी मोलर मर्सेक, पीएसए सिंगापुर, दुबई पोर्ट वर्ल्ड, जन डेल नुल एनवी, हुंडई इंजीनियरिंग एंड कंपनी लिमिटेड और रॉयल बॉसकैलिस जैसी कंपनियों ने‌ निवेश किया है। आने वाले समय में अपनी कार्गो क्षमता को बढ़ाने के लिए मोदी इस सेक्टर में खासी तवज्जों दे सकते हैं।

रेलवे अभी और आगे जाना है

दुनियाभर में रेल का चौथा सबसे बड़ा नेटवर्क भारत में है। सबसे ज्यादा भारतीय सफर के लिए रेलवे को ही तरजीह देते हैं। इस सेक्टर करीब 13 लाख सरकारी कर्मचारी काम कर रहे हैं।

भारतीय रेलवे की सबसे बड़ी ताकत इसकी पैंसेजर सर्विस है जोकि दुनिया में सबसे बड़ी है। आने वाले सालों में 1000 अरब डॉलर का निवेश सार्वजानिक निजी भागीदारी के तहत इस सेक्टर में होना है।

रेलवे में इतने बड़े पैमाने पर निवेश से सरकारी के साथ-साथ निजी क्षेत्र में कारोबार के साथ-साथ नौकरी के अवसर भी उपलब्‍ध होंगे। भारत में बुलेट ट्रेन टेक्‍नोलॉजी समेत कई नई टेक्‍नोलॉजी का आना आने वाले दौर में ही शुरू होगा।

बुलेट ट्रेन का भारत में दौड़ना पीएम मोदी के सबसे अहम सपनों में से एक है। इस सेक्टर में ईएमडी, जीई, सिमंस, एल्सटॉम जैसी कंपनियों ने भारत में निवेश किया है।

अक्षय ऊर्जा उत्पादन: हर घर को कब मिलेगी बिजली?

भारत में जिस पैमाने पर अक्षय ऊर्जा का उत्पादन होना चाहिए। उस स्तर पर अक्षय ऊर्जा का उत्पादन नहीं हो पा रहा है। इतनी संभवनाएं होने के बावजूद भारत इस मामले में काफी पीछे है।

दुनिया भर में अक्षय ऊर्जा उत्पादन के मामले में हमारा स्‍थान 5वां है। पवन ऊर्जा उत्पादन में भी हम 5वें नंबर पर ही हैं। भारत में वर्ष 2022 तक 20,000 सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

वर्ष 2014 तक 1500 मेगावाट बिजली के उत्पादन के लिए फोटो वोल्टिक्स क्षमता को लगा दिया जाएगा। अक्षय ऊर्जा के जरिए बड़े पैमाने पर लोगों की बिजली मांग को पूरा किया जा सकता है।

विदेशी निवेश के साथ-साथ सरकार अक्षय ऊर्जा के उत्पादन का अनिवार्य नियम बनाने से अक्षय ऊर्जा का उत्पादन बहुत आने वाले वर्षों में बहुत तेजी से बढ़ सकता है।

इस सेक्टर में सुजलॉन, एनरकॉन, टाटा बीपी सोलर, वेसटेस, आरआरबी, एनईजी, मिकॉन जैसी कंपनियों ने अक्षय ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में निवेश कर रखा है।

रोड एंड ट्रांसपोर्ट: तो नहीं लगेगा जाम

भारत के अंदर इंफ्रास्ट्रक्‍चर क्षेत्र के सुधार के लिए वर्ष 2012-2017 तक 19 अरब डॉलर का निवेश किया गया है। वर्ष 2017 की समाप्ति तक नेशनल हाइवे का कुल नेटवर्क 100,000 किलोमीटर हो जाएगा।

देश में हाइवे के विकास के लिए 3.8 अरब डॉलर का निवेश तय किया गया है। इस दौरान कुल 40.86 लाख किलोमीटर सड़कों का निर्माण किए जाने का लक्ष्य है।

इन सारे परियोजनाओं में करीब 100 परियोजनाओं को सार्वजानिक- निजी भागीदारी के तहत पूरा किया जाएगा। भारत में जिनाग्सु, प्लस एक्सप्रेसवे बर्चड, हुंडई इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्‍शन लिमिटेड, आइसोलुक्स, योंगमा इंजीनियरिंग लिमिटेड, जैसी कंपनियों ने निवेश किया है। इसके अलावा बहुत सी कंपनियां लाइन में खड़ी निवेश का इंतजार कर रही हैं।

स्पेस में धूम मचाएंगे भारतीय वैज्ञानिक

अंतरिक्ष कार्यक्रम में भारत की सबसे बड़ी खासियत उसका किफायती होना है। मार्स आर्बिटर को मंगल की कक्षा में सफलता पूर्वक दाखिल करवाके भारतीय वैज्ञानिको ने अपना लोहा मनवा दिया है।

पर इसके बावजूद अंतरिक्ष शोध के क्षेत्र में भारत, अमेरिका, चीन और जापान जैसे देशों से बहुत पीछे है। स्पेस रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए चीन और जापान के साथ भारत के पहले ही समझौते कर चुका है।

भारत का इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन(इसरो) 33 देशों और 3 अंतर्राष्ट्रीय संस्‍थानों के साथ मिलकर काम कर रहा है। पर अभी भी भारत को स्पेस रिसर्च के क्षेत्र में बहुत ज्यादा काम करना है।

अमेरिका और चीन भारत से काफी आगे है। भारत में अच्छे वैज्ञानिकों की कमी नहीं है। पर भारत अभी भी टेक्‍नोलॉजी के मामले में और स्पेस रिसर्च शोध में काफी पीछे है।

टेक्‍सटाइल एंड गारमेंट: पूरा विश्‍व पहनेगा भारत के कपड़े

भारत वैश्विक स्तर पर जूट उत्पादन के मामले में नंबर एक पर है। पूरे विश्‍व में टेक्‍सटाइल और गारमेंट बाजार में भारत की हिस्सेदारी 63 फीसदी है।

पूरी दुनिया में टेक्सटाइल उत्पादन के मामले में भारत दूसरे नंबर पर है। वहीं सिल्क और कॉटन के उत्पादन में भी भारत का स्‍थान दूसरा ही है। टेक्सटाइल क्षेत्र में दुनिया भर की 22 बड़ी कंपनियों ने भारत में निवेश किया है।

इन देशों में अमेरिका, जापान, टर्की, इटली, यूके, फ्रांस, मारीशस, दक्षिण कोरिया जैसी कंपनियों ने भारत में निवेश किया है। विस्तृत डिजाइन और वैश्विक स्तर की गुणवत्ता भारतीय टेक्सटाइल सेक्‍टर की जान है। पूरे विश्‍व में भारत के कपड़े निर्यात किए जाते हैं। कई ब्रांड ग्लोबल स्तर पर भी छा चुके हैं।

भारत में 4.5 करोड़ लोगों को सीधे टेक्सटाइल उद्योग से ही रोजगार मिलता है। भारत की अपरैल और टेक्सटाइल इंडस्ट्री वर्ष 2016-17 तक 100 अरब डॉलर के पार हो जाएगी। भारत में फाइबर की मांग बहुत तेजी से बढ़ रही है। टेक्सटाइल इंडस्ट्री में वर्ष 2013-14 में 70 लाख टन फाइबर का उत्पादन हो रहा था। वहीं 2016-17 तक यह आंकड़ा 1 करोड़ टन पहुंच जाने की उम्मीद है।

थर्मल पॉवर से बनेगी बिजली

भारत में बिजली की मांग तेजी से बढ़ती जा रही है। इस बिजली की मांग को पूरा करने में थर्मल पॉवर का बहुत योगदान है। भारत में कोयले के भंडार के कारण थर्मल पॉवर का निर्माण संभव हो पाता है। भारत में 123 अरब टन कोयले का भंडार है।

वहीं 1,355 ‌अरब क्यूबि मीटर नैचुरल गैस का भंडार रखा हुआ है। इनकी मदद से बिजली का उत्पादन किया जाता है। पूरी दुनिया में बिजली उत्पादन करने के मामले में भारत पांचवे नंबर पर है।

पर उत्पादन से साथ ही देश में मांग भी उतनी ही ज्यादा है। पूरी दुनिया में बिजली की खपत के मामले में भारत पहले स्‍थान पर है। भारत में सबसे ज्यादा बिजली का उत्पादन भारत की नवरत्न कंपनी एनटीपीसी ही करती है।

बिजली क्षेत्र में ऑटोमेटिक रूट के जरिए 100 प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया जा सकता है। भारत में सीएलपी होल्डिंग्स हांग-कांग, जीई एनर्जी अमेरिका, एईएस अमेरिका, कोसेप दक्षिण कोरिया,  एबेलॉन क्लीन एनर्जी, जीडीएफ सुऐज जैसी कंपनियों ने अभी भारत में निवेश किया है।

टूरिज्म एंड हॉस्पिलिटी: लोग घूमेंगे भारत

भारत की जीडीपी में टूरिज्म और हॉस्पिलिटी इंडस्ट्री का योगदान 6.8 फीसदी है। इस सेक्टर की वजस से भारत को 18.13 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा प्राप्त होती है।

देश में विश्व के 30 धरोधर स्‍‌थल हैं जिनको देखने के लिए दुनिया भर के लोग आते हैं। वर्ष 2012-13 में 60.97 लाख विदेशी पर्यटकों भारत आए थे। भारत में हॉस्पिलिटी सेक्टर में आई तेजी को देखते हुए योग्य लोगों को तैयार करने के लिए 21 होटल मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट चल रहे हैं।

इस सेक्टर में हर 1 करोड़ डॉलर के निवेश से 78 नौ‌करियां पैदा हो रही हैं। भारत में जाड़े के मौसम में विदेशी पर्यटकों की संख्या में बहुत तेजी से बढ़ोतरी होती हैं। पर्यटन क्षेत्र में एकॉर(फ्रांस), द फोर सीजन ग्रुप (कनाडा), स्टारवुड होटल्स(यूएसए), थॉमस कुक(यूके), मैरियट होटल्स, एक्सपीडिया, प्रीमियर ट्रेवल इन, कॉक्स एंड किंग जैसी कंपनियों ने भारत में निवेश किया है।
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वेलनेस इंडस्ट्री: छाएगा आयुर्वेदिक उपचार

दुनिया भर में आयुर्वेदिक दवाओं और अन्य दवाओं के निर्यात के मामले में भारत का दूसरा नंबर है। आयुर्वेदिक दवाओं और उपचार पद्घति की विदेशां में बढ़ती मांग के चलते यह इंडस्ट्री 162 अरब डॉलर पहुंच गया है।

आने वाले समय में यह बाजार वेलनेस इंडस्ट्री का आकार बढ़कर 490 अरब डॉलर हो जाएगा। भारत में 6200 से ज्यादा कुदरती जड़ीबू‌टियों से संबंधित पौधे हैं। इन पौधों की मांग पूरे विश्‍व में आयुर्वेदिक उपचार के लिए होती है।

आयुर्वेदिक उपचार पद्घति अपनाने वाले लोगों के लिए यह पौधे अहम काम करते हैं। आयुर्वेदिक उपचार के इस पौधों पर ही शोध किया जाता है। वैश्चिक स्तर पर लगातार इसकी मांग बढ़ी है। इस क्षेत्र के चलते भारत में मेडिकल टू‌रिजम के क्षेत्र में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।
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