राज्य सभा सांसद और पेट्रोलियम एवं नेचुरल गैस पर स्थायी समिति के सदस्य तपन सेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गैस कीमतों को करीब दोगुना करने के पिछली यूपीए सरकार के फैसले की समीक्षा करने की अपील की है।
इसके साथ ही सेन ने प्रधानमंत्री से गैस मूल्य निर्धारण के रंगराजन फार्मूले पर भी नए सिरे से विचार करने को कहा है। सेन के मुताबिक रंगराजन फार्मूला त्रुटिपूर्ण और कॉरपोरेट एजेंडे से प्रभावित है।
गैस मूल्य निर्धारण के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी को लिखे पत्र में सेन ने कहा है कि वरिष्ठ भाजपा नेता यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली संसद की स्थायी समिति ने भी गैस कीमतों की समीक्षा करने की मांग की थी।
अब एनडीए सरकार सत्ता में है तो उसे इस मसले पर अपने वायदे के मुताबिक काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को दोनों संसदीय समितियों की रिपोर्ट को संज्ञान लेना चाहिए, जिसमें स्पष्ट रूप से गैस कीमतों की समीक्षा और रंगराजन फार्मूले को निरस्त करने की सिफारिश की गई है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री इस मसले पर गंभीरता से विचार करेंगे।
सेन ने लिखा है कि पिछली सरकार द्वारा इस तरह का माहौल भी तैयार किया गया कि गैस मूल्य निर्धारण का फार्मूला डॉ. रंगराजन की अगुवाई वाले विशेषज्ञों की समिति द्वारा तय किया गया है और इसलिए इसपर सवाल नहीं उठाए जा सकते हैं।
लेकिन, समिति में शामिल सदस्यों को लेकर ही सवाल खड़े हुए, जिनसे बचा नहीं जा सकता है। इसमें हितों के टकराव का मामला भी शामिल है।
ऐसी सूचना है कि रंगराजन समिति के एक सदस्य रिलायंस द्वारा वित्तपोषित थिंक टैंक अब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन से जुड़े हुए हैं। क्या यह नैतिक है?
इस आधार पर आपसे अनुरोध है कि गैस कीमतों में बढ़ोतरी की व्यापक समीक्षा का आदेश जारी कर इस मामले में निष्पक्ष एवं संतुलित दृष्टिकोण अपनाएं और राष्ट्र हित को सुरक्षित करें।
सेन ने कहा कि रंगराजन फार्मूला प्राकृतिक व राष्ट्रीय संसाधनों की हैंडलिंग करने वाले ठेकेदारों को अप्रत्याशित लाभ पहुंचाने के लिए एक बना-बनाया तरीका है।
घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस की कीमत मूल्य लागत और निवेश पर वाजिब रिटर्न के आधार पर तय होनी चाहिए। इसके अलावा, गैस मूल्य निर्धारण का अन्य दूसरा फार्मूला अप्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में ऊर्जा एवं उर्वरक मंत्रालय ने गैस के दाम बढ़ाने का पुरजोर विरोध किया था।
मंत्रालयों का कहना था कि नए फार्मूले के तहत गैस कीमतें 4.2 डॉलर से 8.4 डॉलर करने से सरकार पर सब्सिडी का बोझ बढ़ेगा।
उर्वरक मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक गैस के दाम बढ़ने से 2012-13 से 2016-17 के दौरान सरकार को सालाना 14,500 करोड़ रुपये अतिरिक्त सब्सिडी की जरूरत पड़ेगी, जो 2017-18 से 19,000 करोड़ रुपये हो जाएगी।
सेन ने कहा कि यदि गैस उत्पादन महज 50 एमएमएससीएमडी की रफ्तार से भी होता है, जबकि आवश्यक उत्पादन का आंकड़ा 80 एमएमएससीएमडी है, तब भी गैस कीमतों में प्रस्तावित बढ़ोतरी से रिलायंस इंडस्ट्री को एक साल में 18,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आमदनी होगी, अगले पांच साल में यह 90,000 करोड़ रुपये से अधिक होगी।
जो कि एक बहुत गंभीर मामला है।