परमाणु बिजली को बढ़ावा देने की रणनीति पर चल रही केंद्र की एनडीए सरकार सहयोगी शिव सेना के विरोध के बावजूद महाराष्ट्र के जैतपुर में प्रस्तावित 9900 मेगावाट के परमाणु बिजली संयंत्र के बारे में जल्द ही फ्रांस के साथ फिर से बातचीत शुरू करेगी।
हाल ही में पेश आम बजट में परमाणु सेक्टर के लिए आवंटन में अच्छी वृद्धि करने वाली नरेंद्र मोदी सरकार के इस पहल से महाराष्ट्र में भाजपा की अहम सहयोगी शिव सेना के साथ रिश्तों में तल्खी आ सकती है।
शिव सेना इस परियोजना का विरोध करती रही है। महाराष्ट्र में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं।
मोदी सरकार को करना है फैसला
पिछले दिनों भारत दौरे पर आए फ्रांसीसी विदेश मंत्री लॉरेंट फैबियस की प्रधानमंत्री मोदी और अन्य मंत्रियों के साथ हुई मुलाकात में इस बारे में चर्चा हुई।
माना जा रहा है कि भारत के शीर्ष नेतृत्व ने फ्रांस को आश्वस्त किया है कि वह जैतपुर परमाणु संयंत्र की स्थापना की दिशा में आगे बढ़ने के तरीकों पर वार्ता शुरू करेगा। वैसे शिव सेना जैतपुर परमाणु संयंत्र का कड़ा विरोध करती रही है।
कुछ साल पहले उसने हिंसक विरोध प्रदर्शन भी किए थे। सवाल यह है कि राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा कैसे अपनी सहयोगी को साधेगी। जैतपुर संयंत्र पर फ्रांस की परमाणु उपकरण बनाने वाली सरकारी कंपनी अरेवा एसए और न्यूक्लियर पावर कारपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) के बीच मार्च में बातचीत रुक गई थी।
सरकार ने बढ़ाया बजट
जहां तक परमाणु ऊर्जा के विकास को प्राथमिकता देने की बात है तो नई सरकार ने आम बजट में इस सेक्टर में आवंटन पिछले साल के 6073.72 करोड़ से बढ़ाकर 8213.42 करोड़ रुपये कर मंशा जाहिर कर दी है।
सरकार ने राजस्थान एटॉमिक पावर स्टेशन, भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर और इंदिरा गांधी सेंटर फॉर एटॉमिक रिसर्च के लिए बजट में मामूली वृद्धि की है लेकिन तमिलनाडु के कुडनकुलम में नेबरहुड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए आवंटन 20 करोड़ से बढ़ाकर 150 करोड़ रुपये कर दिया है।
इसी तरह एनपीसीआईएल में निवेश को दोगुना से अधिक बढ़ाकर 643 करोड़ रुपये कर दिया गया है। सरकार ने हैवी वाटर पुल मैनेजमेंट के लिए बजट में 950 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।