पेट्रोलियम मंत्रालय की समस्याओं का समाधान करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक राष्ट्रीय कार्य योजना तैयार करने का निर्देश दिया है।
इसके तहत नीतियों को बेहतर बनाना, नेशनल गैस ग्रिड जैसे मेगा प्रोजेक्ट को तय समय सीमा में पूरा करना, इस वर्ष नवंबर तक नई ऑटो फ्यूल पॉलिसी को अंतिम रूप देना शामिल है। इसके अलावा देश में कोल माइनिंग लीज इलाकों में कोल बेड मीथेन (सीबीएम) के विकास की अनुमति देना भी राष्ट्रीय कार्य योजना में शामिल किया जाएगा।
पेट्रोलियम मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय देश में नेशनल गैस ग्रिड के प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए 20 फीसदी तक वायबिलिटी गैप फंडिंग (वीजीएफ) के प्रस्ताव पर विचार करेगा।
इसके लिए आर्थिक मामले विभाग से तीन माह के अंदर जरूरी मंजूरी हासिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। जनवरी 2015 के पहले इसका ब्लूप्रिंट तैयार कर मंजूरी के लिए कैबिनेट को भेजा जाएगा। गैस ग्रिड विकसित करने के लिए काकीनाडा-हल्दिया 1100 (किलोमीटर), काकीनाडा- चेन्नई 600 (किलोमीटर), चेन्नई-तूतीकोरिन 670 (किलोमीटर), जगदीशपुर-हल्दिया 2050 (किलोमीटर), बरौनी-गुवाहाटी (800 किलोमीटर) सहित दूसरी पाइपलाइनों की पहचान की गई है।
देश में सीबीएम के विकास के प्रयासों में तेजी लाने के लिए पेट्रोलियम मंत्रालय ने मौजूदा कोल माइनिंग लीज के तहत आने वाले सीबीएम के दोहन और प्रायॉरिटी सेक्टर के बाहर सीबीएम गैस की आर्म्स लेंथ सेल की अनुमति देने का प्रस्ताव किया है। उम्मीद है कि मंत्रालय मौजूदा सीबीएम नीति में संशोधन के लिए सीसीइए के पास एक नोट भेजेगा।
इस नोट में विभिन्न सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की कंपनियों को आवंटित की गई कोल माइनिंग लीज के तहत आने वाले इलाकों में सीबीएम के उत्खनन और दोहन की अनुमति देने का सुझाव दिया जा सकता है। सीबीएम के उत्पादन के लिए निवेश को प्रोत्साहन देने के लिए कांट्रेक्टर को एलोकेशन प्रायॉरिटी के बिना प्राइस बिडिंग के आधार पर गैस बेचने की अनुमति दी जाएगी। इसके अलावा मौजूदा सीबीएम कांट्रैक्ट को सरल बनाया जाएगा।
उम्मीद है कि पेट्रोलियम मंत्रालय इस वर्ष नवंबर तक नई ऑटो फ्यूल पॉलिसी पर सुमित्रा चौधरी की की सिफारिशों के आधार पर कैबिनेट नोट तैयार करेगा। रिपोर्ट में अप्रैल, 2014 तक चरणबद्ध तरीके से बीएस 4 फ्यूल और अप्रैल 2020 तक बीएस 5 फ्यूल लागू करने की बात कही गई है।
इस रिपोर्ट को सभी मुख्यमंत्रियों और केंद्र सरकार के मंत्रालयों को उपलब्ध कराने के साथ वेबसाइट पर डाला गया है। पेट्रोलियम मंत्रालय इस रिपोर्ट के आधार पर जल्द से जल्द नई ऑटो पॉलिसी को अंतिम रूप देना चाहता है। नई ऑटो पॉलिसी को लागू करने के लिए रिफाइनरियों में बड़े पैमाने पर निवेश करना होगा। इसके लिए फंड जुटाने के लिए सेस का सहारा लेना होगा।