सार्वजनिक बैंकों को लेकर हाल में आए कई सारे नकारात्मक मामलों को देखते हुए वित्त मंत्रालय अब सख्ती के मूड में आ गया है।
मंत्रालय जहां बैंकों के डूबते कर्ज से परेशान हैं, वहीं उन पर लगे मनी लांड्रिंग के आरोपों से निगरानी प्रणाली में ढीले रवैये को देखते हुए अब सख्त कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। इसी के तहत मंत्रालय ने बैंकों को अपनी कार्यप्रणाली को बेहतर करने के निर्देश दिए हैं।
बृहस्पतिवार को वित्त मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सार्वजनिक बैंक प्रमुखों की बैठक में यह सारे मुद्दे उठे हैं। बैठक में भाग लेने वाले एक सीएमडी ने बताया कि सार्वजनिक बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज के बढ़ते रिस्ट्रक्चरिंग मामलों को कम करने के निर्देश दिए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, वित्त मंत्रालय ने बैंकों को कहा है कि वह अपने कॉरपोरेट डेट रिस्ट्रक्चरिंग प्रणाली को बेहतर करें। उन्हें कहा गया है कि सीडीआर में आ रहे मामलों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र व्यवस्था करें। इस तरह के मामलों में ढुल मुल रवैया न रहने पाए और कंपनियां अनुचित फायदा न उठा सकें।
सीडीआर सेल के आंकड़ों के अनुसार मार्च 2013 तक करीब तीन लाख करोड़ रुपये तक रिस्ट्रक्चरिंग के आवेदन आए हैं। जिसमें से दो लाख 29 हजार करोड़ रुपये के कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग की मंजूरी दी जा चुकी है। जबकि मार्च 2012 तक 1,50,515 करोड़ रुपये कर्ज की रिस्ट्रक्चरिंग हुई थी। ज्यादातर मामले सार्वजनिक बैंकों के हैं। साथ ही इन बैंकों की बढ़ती गैर निष्पादित संपत्तियां भी वित्त मंत्रालय के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।
बैंकों को मिलेगा कारण बताओ नोटिस
ऑनलाइन पत्रिका कोबरापोस्ट द्वारा बैंकों पर मनीलांड्रिंग के आरोप सार्वजनिक बैंकों तक भी पहुंच गई है। इस संबंध में की गई प्रारंभिक जांच के बाद अब आरोपी बैंकों को कारण बताओ नोटिस भेजने की भी तैयारी है। साथ ही आरोपी कर्मचारियों पर भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।
कृषि कर्ज माफी घोटाले पर रिपोर्ट इस माह
कृषि कर्ज माफी योजना में हुआ घोटाले पर बैंकों को अपनी रिपोर्ट इस महीने वित्त मंत्रालय को सौंपनी पड़ सकती है। सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार को हुई बैठक में वित्त मंत्रालय ने इस संबंध में रिपोर्ट जल्द पेश करने को कहा है।