इस साल कमजोर मानसून के चलते पशु चारे के दाम में बढ़ोतरी होने लगी है लेकिन मिल्क पाउडर के दाम गिरने से दूध के महंगा होने का खतरा फिलहाल टल गया है।
देश की प्रमुख दुग्ध उत्पादक संस्थाओं अमूल और मदर डेयरी के आला अधिकारियों ने अगले 3-4 महीने दूध के दाम नहीं बढ़ने की उम्मीद जताई है।
गुजरात कोऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन (अमूल) के प्रबंध निदेशक आरएस सोढ़ी ने बताया कि अगले कुछ महीनों में दूध के महंगा होने के आसार बेहद कम हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में पिछले तीन-चार महीनों से मिल्क पाउडर के दाम गिरते जा रहे हैं, जिसके चलते इसका निर्यात थम गया है। घरेलू बाजार में मिल्क पाउडर के दाम करीब 15-18 फीसदी तक गिर चुके हैं।
'कमजोर मानसून का दुग्ध उत्पादन पर असर नहीं'
दूसरी तरफ, देश में दूध की आपूर्ति ठीक है। सोढ़ी के मुताबिक, जब बारिश कम होती है, उस साल किसान पशुपालन पर ज्यादा ध्यान देते हैं। इसलिए कमजोर मानसून का दुग्ध उत्पादन पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।
मदर डेयरी के एमडी एस. नागार्जुन का कहना है कि फिलहाल दूध की आपूर्ति को देखते हुए लगता है कि जल्द दूध के दाम बढ़ाने की नौबत नहीं आएगी।
मौसम विभाग ने जुलाई के पहले हफ्ते में मध्य और उत्तर भारत में मानसून सक्रिय होने के आसार जताए थे। लेकिन 5 जुलाई तक भी देश में सामान्य से 43 फीसदी कम बारिश हुई है।
घरेलू बाजार में ही खपेगा डेयरी कंपनियों का माल
उत्तर-पश्चिमी भारत में सामान्य से 49 फीसदी और मध्य भारत में 64 फीसदी कम बारिश हुई है। बारिश में कमी की मार खरीफ की बुवाई और पशु चारे पर पड़ रही है।
रबी की कटाई के बाद से भूसे के दाम करीब 30-35 फीसदी तक बढ़ चुके हैं। इसलिए पशुपालन करने वाले किसानों के मुनाफे पर चोट पड़नी तय है।
पिछले साल भारत से करीब 1.2 लाख टन मिल्क पाउडर का निर्यात हुआ, जो इस साल घटकर सिर्फ 30-35 हजार टन रह सकता है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में मिल्क पाउडर के दाम करीब 220 रुपये किलो के आसपास है, जबकि घरेलू बाजार में इसका भाव 250 रुपये चल रहा है। इसलिए निर्यात संभव नहीं है और डेयरी कंपनियों को अपना माल घरेलू बाजार में ही खपाना पड़ेगा।