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ग्रामीण बाजार पर फोकस बढ़ा रही है मारुति

Mon, 23 Jun 2014 03:10 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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पिछले करीब तीन दशक से घरेलू कार बाजार की मार्केट लीडर मारुति सुजुकी अब ग्रामीण भारत की ओर अपना फोकस बढ़ा रही है। कंपनी अपनी मौजूदा स्थिति को बरकरार रखने के लिए नए-नए मार्केट टूल्स का भी इस्तेमाल कर रही है। इसके तहत, मारुति सुजुकी कुछ नए मॉडल लांच करने की तैयारी में है, वहीं उसकी योजना हल्के व्यावसायिक वाहन सेगमेंट में भी उतरने की है। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) मयंक पारीक ने कंपनी की भविष्य की योजनाओं पर अमर उजाला के सुजय मेहदूदिया से विस्तार से बातचीत की। पेश है इसके प्रमुख अंश -
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 सवाल : अंतरिम बजट में उत्पाद शुल्क में हुई कटौती के बावजूद ऑटो इंडस्ट्री लगातार बिक्री में गिरावट के चलते सुस्ती झेल रही है। देश की अग्रणी ऑटोमोबाइल कंपनी के रूप में मारुति सुजुकी इस मुश्किल स्थिति का कैसे सामना कर रही है?
जवाब : पिछला साल ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक मुश्किल वर्ष रहा, लेकिन आगे हम बेहतर हालात की उम्मीद करते हैं और भविष्य को लेकर आशावादी हैं। हालांकि, कुल बाजार में जहां 6 फीसदी की गिरावट रही, वहीं मारुति सुजुकी ने 0.3 फीसदी की मामूली ग्रोथ दर्ज की। कहने का तात्पर्य यह कि हमने ग्राहकों के रुझान में कोई कमी नहीं देखी है। पिछले साल कंपनी में 67 लाख इंक्वायरी (पूछ-परख) हुई, जिसमें से बिक्री 12 लाख कारों की हुई। यह दर्शाता है कि ग्राहक कार खरीदने की इच्छा से पूछपरख कर रहे हैं लेकिन खरीदारी टाल रहे हैं। हमें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। केंद्र में नई स्थिर सरकार आने से हमें रोजगार के अधिक अवसर उपलब्ध होने, मैन्यूफैक्चरिंग की रफ्तार बढ़ने और प्रस्तावित जीएसटी लागू होने की उम्मीद है। हमारा मानना है कि आने वाला साल बेहतर होगा। वित्त वर्ष 2014-15 में हम दोहरे अंक में ग्रोथ हासिल करने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
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सवाल : ऐसा लगता है कि मेट्रो शहरों की ग्रोथ में ठहराव आ गया है और कंपनियों को अपना फोकस देश में अन्य बाजारों की ओर करने की जरूरत है। इसको लेकर मारुति सुजुकी क्या कर रही है। नए बाजारों को लेकर आपकी क्या रणनीति है?
जवाब : बड़े शहरों में कारों की बिक्री की स्थिति प्रति हजार में केवल 25 है। इसलिए यह कहना गलत है कि बड़ों शहरों में कारों की मांग में ठहराव आ चुका है। कारों की पूछपरख को लेकर कोई कमी नहीं देखने को मिली है लेकिन ग्राहक खरीदारी की योजना को टाल रहे हैं। ऐसा ज्यादातर पहली दफा कार खरीदने वालों (फर्स्ट टाइम बॉयर ) की तरफ से हो रहा है। पिछले साल फर्स्ट टाइम बॉयर की संख्या घटकर 37 फीसदी पर आ गई, जो 2013 के 50 फीसदी थी। इससे स्पष्ट है कि बाजार में मांग है लेकिन खरीदारी को आगे के लिए टाला जा रहा है। इस स्थिति से निपटने के लिए हमने कुछ रणनीति बनाई है। हमने मारुति ट्र्रू वैल्यू ब्रांड के तहत एक्सचेंज पर फोकस किया है। पिछले साल हमने इस बिजनेस में 16 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। हमारी 27 फीसदी से अधिक नई कारें एक्सचेंज के जरिए बिकीं। हमने मारुति ट्रू वैल्यू के जरिए कुल 2,89,000 कारें बेचीं।

हमारी दूसरी रणनीति बड़े शहरों के अलावा देश के भीतरी हिस्सों में बिक्री बढ़ाने की रही। मेट्रो शहरों में जहां एक स्थिर ग्रोथ है, वहीं कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक संभावनाएं हैं। इसलिए हमने ग्रामीण क्षेत्रों में अपना फोकस बढ़ाया। हमने 1,00,000 गांवों तक पहुंच बनाने का बीड़ा उठाया। हम देश के 94,000 गांवों में कार बेचने में सफल रहे। वर्तमान में देश की कुल कार बिक्री में ग्रामीण भारत की हिस्सेदारी 31 फीसदी है, जो 2007-08 में महज 3.7 फीसदी थी। हमारी अन्य रणनीति खास बाजार समूहों तक अपनी पहुंच बनाने की रही। इसमें सबसे पहले ऐसे उभरते समूहों के आमदनी के स्रोतों और उसके तरीकों को चिन्हित किया गया। इसके बाद इन तक पहुंच बनाने की जिम्मेदारी एक स्थानीय डीलर और उसकी रेजीडेंट डीलर सेल्स एक्सीक्यूटिव (आरडीएसई) टीम को दी गई। आरडीएसई टीम उन तक स्थानीय कार्यक्रमों, मेला और पुस्तिकाओं के जरिए संपर्क करती है। मसलन नागपुर में संतरा उत्पादक, राजस्थान के पारंपरिक हस्तशिप्ली, महाराष्ट्र में मंदिरों के पुजारी आदि समूहों तक पहुंच बनाना। आज हम ऐसे 372 छोटे वर्गों में काम कर रहे हैं और पिछले साल इसके जरिए हमने 60,000 कारें बेचीं।

सवाल : कार निर्माताओं सहित सभी अंतरराष्ट्रीय निवेशक ऐसा मानते हैं कि भारत एक बड़ा बाजार है लेकिन ऐसा लगता है कि बड़ा बाजार ग्रामीण भारत में निहित है। मारुति सुजुकी इस बाजार में अपनी पकड़ बनाने के लिए क्या कर रही है और यह बाजार कितना बड़ा है?
जवाब : देश के 6,35,000 गांवों में से फिलहाल 94,000 गांवों में हम अपनी कारें बेचते हैं और भविष्य में इसके विकास की व्यापक संभावनाएं हैं। हमने 2014-15 में 2,00,000 गांवों तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। हम नए-नए तरीके जैसे कि ग्रामीण उपभोक्ताओं को ध्यान में रखकर ‘वीडियो रथ’ जैसी मार्केटिंग रणनीति अपनाते हैं। वर्तमान में हमारे पास 200 वीडियो रथ हैं, जहां वाहन पर एक बड़ी प्लाज्मा स्क्रीन लगी रहती है और स्थानीय फिल्मों के जरिए हम लोगों में अपने उत्पादों की जानकारी देते हैं। हमने एक्सटेंशन आउटलेट्स भी बना रखे हैं, जो कि पास के डीलर की एक शाखा होती है। हम एक नए आर फॉर्मेट (रूरल फॉर्मेट) पर भी विचार कर रहे हैं।  

सवाल : आपके डीलर और डिस्ट्रीब्यूटर्स मौजूदा आर्थिक सुस्ती का सामना कैसे कर रहे हैं, और इस स्थिति में आपने कारों की बिक्री बढ़ाने के लिए कौन से कदम उठाए हैं?
जवाब : मेरा मानना है कि चीजें अच्छी दिशा में जा रहीं हैं और मौजूदा समय में हम सभी वित्त वर्ष 2014-15 के लिए दोहरें अंकों में ग्रोथ का लक्ष्य हासिल करने के लिए काम कर रहे हैं। इसके अलावा हम नए मॉडल लांच करने की तैयारी कर रहे हैं। अलग -अलग सेगमेंट में इस वर्ष कम से कम तीन नई माडॅल हम लांच करेंगे। कुल मिला कर देंखें तो चीजें पहले से काफी बेहतर दिख रहीं हैं।

सवाल : क्या यह सच है कि नई लांच की गई मॉडल जैसे सेलेरियो तीन से छह माह के वेटिंग पीरिएड के साथ बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं जबकि दूसरी मॉडल कड़ी प्रतिस्पर्धा के कारण कठिनाई का सामना कर रहीं हैं?

जवाब : यह कहना सही नही हैं कि सिर्फ नई लांच की गई मॉडल बेहतर प्रदर्शन कर रहीं हैं। वास्तव में पिछले वर्ष हमारे मॉडल जैसे वैगन आर और डिजायर ने बेहतर ग्रोथ दर्ज की थी। हां यह सही है कि हाल में लांच की गई सेलेरियो को लेकर ग्राहकों का रिस्पांस हमारी उम्मीदों से बेहतर रहा है। सेलेरियो के ऑटोमैटिक वर्जन का वेटिंग पीरिएड लगभग 6-8 माह है। हमारे दूसरे उत्पाद भी बेहतर कर रहे हैं। हमने सकारात्मक बिक्री सुनिश्चित करने के लिए उत्पाद नवाचार और सेवाओं, ग्रामीण बाजारों, एक्सचेंज, स्पेयर्स और एक्सेसरीज पर लगातार ध्यान केंद्रित किया है।

सवाल : ऐसा प्रतीत होता है कि छोटी कार और मिड-साइज सेगमेंट, जहां मारुति का प्रभुत्व रहा है, सभी कार निर्माताओं का पसंदीदा सेगमेंट बन गया है। भारत हो या विदेश यह बात दोनो जगहों पर दिखती है। ऐसी स्थिति में मारुति अपनी जमीन सुरक्षित रखने के लिए क्या योजना बना रही है?

जवाब : मैं आपके सवाल का जवाब दूें ,इससे पहले कुछ आंकड़ों पर गौर करें। 2003-04 में यात्री कार सेगमेंट में कुल 32 ब्रांड थे और हमारी बाजार हिस्सेदारी 50 फीसदी थी। 2013-14 में 74 से कार ब्रांड हैं और हमारी बाजार हिस्सेदारी अब भी 50 फीसदी है। इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा दोगुनी हो गई लेकिन हमारी बाजार हिस्सेदारी बरकरार है। हमारी लो-कॉस्ट-ऑफ ओनरशिप, बिक्री के लिए गहन नेटवर्क, ऑफ्टर सेल्स एंड एक्सचेंज, व्यापक ड्राइविंग ट्रेनिंग नेटवर्क, कस्टमर डाटाबेस हमारी ताकत हैं। मौजूदा समय में हमारे 1330 से अधिक सेल्स आउटलेट्स हैं। हमारा लक्ष्य अगले दो-तीन माह में  आउटलेट्स की संख्या को दोुगना करना है। आगे चल कर हम अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियों को और मजबूत करेंगे।

सवाल : एसयूवी ऐसा सेगमेंट हैं, जहां ऐसा लगता है कि मारुति पिछड़ रही है, खास कर लोवर इंड एसयूवी सेगमेंट जहां डस्टर, टेरानो, इको स्पोर्ट्स बहुत अच्छा प्रदर्शन कर रहीं हैं। क्या मारुति को तेजी से बढ़ रहे इस सेगमेंट में न होने की कमी खल रहीं है और इस सेगमेंट में प्रतिस्पर्धी कंपनियों का मुकाबला करने के लिए कंपनी की क्या रणनीति है?
जवाब : इस सेगमेंट में हमारे कुछ मॉडल पाइपलाइन में हैं। हम इनके बारे में उचित समय पर बात करेंगे। हमने ऑटो एक्सपो में दो पूरी तरह से नए वाहन, कांसेप्ट सियाज मिड साइज सेडान और एस क्रास क्रासओवर यूटिलिटी वहीकल प्रदर्शित किया था। इन वाहनों को ग्राहकों की ओर से बेहतर फीडबैक मिला है ओर उम्मीद है कि इसे हमारे मौजूदा पोर्टफोलियों में जोड़ा जाएगा। हमने आने वाले समय में हल्के वाणिज्यिक वाहन लांच काने की घोषणा भी की है।
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