प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने सार्वजनिक उपक्रमों के प्रमुखों को 8 फीसदी विकास दर हासिल करने के लिए हरसंभव कदम उठाने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा है कि इसके लिए सरकार को 37-38 फीसदी की निवेश दर को हासिल करना होगा।
मंगलवार को पीएम और वित्त मंत्री के साथ हुई सार्वजनिक उपक्रमों के प्रमुखों की बैठक में उनके प्रबंधन से जुड़े कई मसलों पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री ने भरोसा दिया है वे हर छह महीने में इस तरह की बैठक करेंगे। सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों की परियोजना को मंजूरी मिलने में आने वाली अड़चनों को दूर करने का आश्वासन भी दिया है।
भारी उद्योग मंत्री प्रफुल्ल पटेल ने बताया कि बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के अलावा वित्त मंत्री पी. चिंदबरम और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री ने पीएसयू प्रमुखों को कंपनी का कैश सरप्लस समझदारी और समयबद्ध तरीके से करने को कहा है। उन्होंने विभिन्न मंत्रालय के बीच तालमेल पर भी जोर दिया। सार्वजनिक उपक्रमों की स्वायत्ता के मुद्दे पर सरकार जल्द ही एक उच्च स्तरीय प्रणाली बनाएगी।
बैठक के बाद स्कोप के महानिदेशक यूडी चौबे ने बताया कि पीएसयू प्रमुखों ने एमओयू की प्रक्रिया में सुधार, परियोजना को मंजूरी में देरी और विनिवेश से जुड़े कई मुद्दे सामने रखे। प्रधानमंत्री ने इन दिक्कतों को हल करने का भरोसा दिया है।
बैठक में एनटीपीसी, ओएनजीसी, सेल, भेल, गेल, एनएचपीसी सहित 25 कंपनियों के प्रमुख मौजूद थे। यह बैठक निजी क्षेत्र के उद्योगों के प्रमुखों के साथ प्रधानमंत्री की सालाना बैठक की तर्ज पर आयोजित की गई।