वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने कहा कि सरकार ने विभिन्न बचत योजनाओं और भविष्य निधि फंड के अंतर्गत एजेंटों के कमीशन में कमी करने का निर्णय किया है। यह निर्णय निवेशकों के हितों को ध्यान में रखकर किया गया है। राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान चिदंबरम ने बताया कि सभी स्टेकहोल्डर्स और प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श करने के बाद ही सरकार ने पीपीएफ और एससीएसएस (सीनियर सिटीजन बचत योजना) पर एजेंट का कमीशन घटाकर शून्य और एसएएस (स्टैंडर्ड एजेंसी सिस्टम) के अंतर्गत कमीशन 0.5 फीसदी करने का फैसला किया है।
सरकार का यह कदम श्यामला गोपीनाथ समिति की सिफारिशों के भी अनुरूप है। समिति ने एससीएसएस पर एजेंट का कमीशन घटाकर 0.5 फीसदी और पीपीएफ पर एक फीसदी से घटाकर शून्य करने की सिफारिश की थी। समिति ने महिला प्रधान क्षेत्रीय बचत योजना (एमपीकेबीवाई) पर भी कमीशन को चरणबद्ध तरीके से घटाकर 1 फीसदी करने की भी सिफारिश की है। अभी एमपीकेबीवाई के अंतर्गत एजेंट का कमीशन 4 फीसदी है।
बैंकों से कहा गया है एनपीए घटाएं: चिदंबरम
सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अपनी गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) की रिकवरी के लिए नए कदम उठाने को कह है। वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने यह जानकारी राज्यसभा में दी। प्रश्न काल के दौरान वित्त मंत्री ने सदन को बताया कि एनपीए की रिकवरी और प्रबंधन के लिए सरकारी बैंकों से कई तरह के उपाय करने को कहा गया है। इनमें रिकवरी के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करना और विशेष रिकवरी अभियान चलाने जैसे उपाय शामिल हैं। चिदंबरम ने कहा कि बैंकों के एनपीए में बढ़ोतरी अर्थव्यवस्था पर पड़ रहे दबाव को परिलक्षित करती है और जैसे-जैसे यह दबाव कम होगा व आर्थिक हालात सुधरेंगे, एनपीए में कमी देखने को मिलेगी। साथ ही उन्होंने आर्थिक दबाव में चल रहे सेक्टरों को कुछ सहारा दिए जाने की जरूरत जताई।