सरकार ने आधार भुगतान प्रणाली के जरिए एक अक्टूबर से 14 करोड़ एलपीजी ग्राहकों को सब्सिडी का सीधे नगद हस्तांतरण उनके खाते में करने की योजना बनाई है।
आगामी 15 मई से देश के 20 जिलों में पायलट परियोजना शुरू करने के बाद सरकार 1 अक्टूबर से देश भर में एलपीजी सब्सिडी के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) का विस्तार करने पर विचार कर रही है।
सूत्रों के मुताबिक इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए वित्त मंत्री पी चिदंबरम, योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह आहलूवालिया, ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश और पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली सोमवार को राज्यों के अधिकारियों के साथ डीबीटी योजना की समीक्षा करने वाले हैं।
उपभोक्ता को इसका लाभ पाने के लिए अपने बैंक खातों को आधार नंबर से जोड़ना होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक मौजूदा स्तर पर हर उपभोक्ता को सालाना 4,000 रुपये की सब्सिडी मिल सकती है। जबकि प्रत्येक घरेलू उपभोक्ता को एक वर्ष में 9 रियायती सिलेंडर देने का प्रावधान पहले ही कर दिया गया है।
हालांकि चिंताजनक मसला यह है कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की ओर से अब तक करीब 32 करोड़ आधार कार्ड जारी किये जा चुके हैं, लेकिन महज 80 लाख ग्राहकों का बैंक खाता ही आधार से जुड़ सका है।
सूत्रों के मुताबिक दिल्ली में उपभोक्ताओं को 901.50 रुपये के बाजार मूल्य पर प्रति रसोई गैस सिलेंडर खरीदना होगा।
इसमें से नौ सिलेंडर के लिए सरकार की ओर से सब्सिडी की रकम बुकिंग के बाद ग्राहकों के खाते में डाल दी जाएगी।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि इस बाबत बैंकों को अपने कामकाज में तेजी लाने के लिए कहा जा चुका है।
सरकार को उम्मीद है कि डीबीटी के जरिए न केवल ग्राहकों को नगद सब्सिडी का लाभ होगा बल्कि फर्जी कनेक्शन और रसोई गैस सिलेंडरों का दुरुपयोग भी खत्म हो सकेगा।