रसोई गैस सिलेंडर पहुंचाने में विलंब या वजन कम होने पर अब डीलरों की खैर नहीं। सरकार ने एलपीजी उपभोक्ताओं के अधिकार में वृद्धि करते हुए शुक्रवार को एलपीजी पोर्टेबिलिटी योजना की शुरुआत कर दी। इसके तहत अगर ग्राहक एलपीजी डीलर की सेवा से खुश नहीं हैं तो वे अपना डीलर बदल सकते हैं। हालांकि उपभोक्ताओं को कंपनी बदलने की आजादी नहीं दी गई है। इसके अलावा नए एलपीजी कनेक्शन के लिए ऑन लाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू की गई है।
पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली ने नई योजना के बारे में बताते हुए कहा कि पायलट परियोजना के तौर पर इसे चंडीगढ़ में शुरू किया गया है। अगले वित्त वर्ष 2013-14 में योजना को 25 अन्य जिलों में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि नई योजना चरणबद्ध तरीके से देश भर में लागू की जाएगी। ग्राहक डीलरों की रेटिंग को देखते हुए अपने इलाके में किसी दूसरे डीलर से एलपीजी की सुविधा ले सकेंगे।
दरअसल, एलपीजी आपूर्ति के आधार पर ग्राहक डीलरों की रेटिंग एक से पांच के बीच कर सकते हैं। जो डीलर ग्राहकों तक एलपीजी की आपूर्ति 48 घंटे के अंदर करेगा उसे 5 अंक मिलेंगे, जबकि बुकिंग के 10 दिन बाद सिलेंडर आपूर्ति कराने वाले को कोई भी अंक नहीं मिलेगा। ऐसे डीलरों पर कड़ी कार्रवाई करने का प्रावधान किया गया है।
मोइली ने कहा कि पोर्टेबिलिटी के कारण डीलरों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और इसके ग्राहक सुविधा में सुधार हो सकेगा। वहीं, मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए ग्राहक तेल कंपनियों की योजनाओं को जान सकेंगे और उन तक शिकायत भी सीधे पहुंचा सकेंगे। दूसरी ओर, अपने ग्राहक को जाने (केवाईसी) प्रक्रिया को ऑन लाइन तरीके से पूरा कर आवेदक नया कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं। इस दौरान मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि कंपनी पोर्टेबिलिटी को लागू करना फिलहाल संभव नहीं है, क्योंकि प्रत्येक तेल कंपनी को केवल अपने सिलेंडर के रिफिल का अधिकार है।