कर सुधार के रास्ते पर तेजी से चल रही सरकार अब आयकर के कुछ नियमों को भी सरल बना रही है। अब वकीलों, डॉक्टरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स औप अन्य पेशेवरों को राहत देने की तैयारी चल रही है।
इस मसले पर सरकार ने संबंधित व्यक्तियों एवं आम जनता से सुझाव मंगाए हैं। बताया जा रहा है कि इस दौरान आए सुझावों को आगामी बजट में शामिल किया जाएगा।
वकील, डॉक्टर, इंजीनियरिंग सेवा प्रदान करने वाले पेशेवर, ब्यूटीशियन, कंपनी सचिव और इस तरह की सेवा उपलब्ध कराने वाले व्यक्तियों की आय की गणना कुछ अलग तरीके से की जाती है।
यह गणना आयकर कानून की धारा 145 के उपखंड 1 के तहत या तो कैश सिस्टम के आधार पर या फिर मर्केंटाइल सिस्टम ऑफ अकाउंटिंग के आधार पर की जाती है।
कैश और मर्केंटाइल सिस्टम में ये है अंतर
कैश सिस्टम में तो प्रदान की गई सेवाओं के बदले जो भुगतान हुआ, उसी पर कर चुकाया जाता है, लेकिन मर्केंटाइल सिस्टम के तहत सेवा देने के बाद यदि बिल भेज दिया गया है तो आयकर विभाग उस पर कर मांग लेता है।
उसमें यह नहीं देखा जाता है कि भुगतान हुआ है या नहीं हुआ है। इसे कारोबारी भाषा में एकरुअल सिस्टम भी कहा जाता है। इन पेशेवरों की काफी दिनों से मांग है कि इसमें सुधार किया जाए।
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि आयकर कानून की धारा 145 में ही कंप्यूटेशन एवं डिस्क्लोजर स्टैंडर्ड (आईसीडीएस) के अधिसूचित करने का प्रावधान है।
आईसीडीएस तैयार करने के लिए केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने दिसंबर 2010 में एक कमेटी का गठन किया था, जिसमें विभागीय अधिकारियों के साथ-साथ पेशेवरों को भी शामिल किया गया था।
इसकी पहली रिपोर्ट अगस्त 2011 में जबकि अंतिम रिपोर्ट अगस्त 2012 में आ गई थी। इस पर संबंधित व्यक्तियों से सुझाव भी मंगाए गए थे, लेकिन अभी तक इस पर कुछ नहीं हो पाया है।
अरुण जेटली ने फिर शुरू किया काम
नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बनी सरकार में वित्त मंत्री बनने के बाद अरुण जेटली ने इस दिशा में फिर से काम शुरू करवाया और पहले से आए सुझावों के आधार पर 12 आईसीडीएस का फिर से मसौदा तैयार करवाया।
तब यह किया गया है कि इस मसौदे पर सभी स्टेकहोल्डरों और आम जनता से प्रतिक्रिया मंगाई जाए, ताकि इस पर कोई फैसला लिया जा सके।
मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आगामी बजट प्रस्ताव में इसे भी शामिल करने की तैयारी है। इस बीच तय किया गया है कि 8 फरवरी 2015 तक इस पर सुझाव मंगा लिया जाए। उसके बाद जो भी संशोधन वांछित हो, उसे लागू कर के इसे आगे बढ़ा दिया जाए।