बजट से पहले ही मोदी सरकार ने रेल किराया बढ़ाकर आम आदमी को आर्थिक सुधार के नाम पर कड़वी डोज दे दी है। केंद्र सरकार ने भारतीय रेल के इतिहास में अब तक सबसे ज्यादा बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया।
विज्ञापन
यात्री किराए में 14.2 प्रतिशत और माल भाड़े में 6.5 फीसदी किराया बढ़ाया गया है। बढ़ा हुआ किराया आगामी 25 जून से लागू होगा। एनडीए सरकार के पहले रेल बजट से तीन हफ्ते पहले लिए गए इस फैसले के अनुसार यात्री किराये में 10 फीसदी सीधे वृद्धि की गई है।
जबकि 4.2 फीसदी की बढ़ोत्तरी (एफएसी) फ्यूल एडजस्टमेंट कंपोनेंट के तहत की गई है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि एफएसी पुरानी दर पर लागू होगी या दस फीसदी की वृद्धि के बाद किराया दरों पर इसे लागू किया जाएगा।
विज्ञापन
रेलवे के अनुसार रेल आरक्षण चार्ज, सुपरफास्ट सरचार्ज की दर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। रेलवे ने स्पष्ट किया है कि 25 जून अथवा बाद की तारीखों में यात्रा के लिए पहले से जारी किए जा चुके टिकटों पर यात्रा करते समय ट्रेन में टीटीई अतिरिक्त किराया वसूलेंगे।
जेब होगी ढीली, सफर होगा महंगा
रेलवे के अनुसार अब सेकंड क्लास मासिक पास के लिए यात्रियों को दोगुना भुगतान करना होगा। अब कुल 30 सिंगल यात्रा के बराबर किराया देना होगा जबकि अभी तक यह केवल 15 सिंगल यात्रा के बराबर लिया जा रहा था।
प्रथम श्रेणी के पास के लिए सेकंड क्लास के पास का चार गुना भुगतान करना होगा। मासिक पास के लिए किराये का यह आकलन बढ़ी हुई दरों के आधार पर ही किया जाएगा। मालभाड़े में 25 जून से 6.5 प्रतिशत की वृद्धि का फैसला लिया गया है।
इसके अलावा कम दूरी (100 किमी) के भाड़े पर मिलने वाली छूट को खत्म कर दिया गया है। रेलवे ने न्यूनतम दूरी की सीमा भी 100 किमी से बढ़ाकर 125 किमी कर दी है।
मोदी सरकार का पहला कठिन निर्णय
अंतरिम बजट के बाद तत्कालीन यूपीए सरकार के समय में ही किराये व भाड़े में वृद्धि का फैसला ले लिया गया था। मगर चुनाव की घोषणा के चलते इसे लागू नहीं किया गया।
आम चुनाव की मतगणना के दिन 16 मई को अचानक रेलवे ने किराये व भाड़े में वृद्धि के इस प्रस्ताव को 20 मई से लागू करने का आदेश भी जारी कर दिया।
आदेश जारी करने के लगभग चार घंटे बाद तत्कालीन रेलमंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे के निर्देश पर किराया वृद्धि के इस आदेश को वापस ले लिया गया। खड़गे ने तब कहा था कि किराये में वृद्धि का फैसला उन्होंने नई सरकार के लिए छोड़ दिया है।
मोदी सरकार ने शुक्रवार को यूपीए सरकार के इसी प्रस्ताव को लागू करने का फैसला किया।
कितनी ढीली होगी आपकी जेब
पुराना किराया दिल्ली से-------स्लीपर-------3एसी-------2एसी-------1एसी पटना-------435-------1130-------1625-------2740 लखनऊ-------280-------710-------1000-------1690 कोलकाता-------555-------1450-------2100-------3605 चंडीगढ़-------160-------470-------665-------1105 चेन्नई-------685-------1775-------2600-------4490 मुंबई-------525-------1365-------1970-------3375
नया किराया (लगभग) दिल्ली से-------स्लीपर-------3एसी-------2एसी-------1एसी पटना-------497-------1290-------1856-------3129 लखनऊ-------320-------811-------1142-------1930 कोलकाता-------634-------1656-------2398-------4117 चंडीगढ़-------183-------537-------759-------1262 चेन्नई-------782-------2027-------2969-------5127 मुंबई-------599-------1559-------2250-------3854
तो ऐसे बढ़ेगी महंगाई
रेल माल भाड़े में वृद्धि का असर भी सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ेगा। स्टील, लोह अयस्क, फल व सब्जियां और कोयला समेत कई महत्वपूर्ण चीजों के ट्रांसपोर्ट के लिए रेल ही प्रमुख साधन है।
रेल किराए में बढ़ोतरी से निश्चित तौर पर इन वस्तुओं की कीमतों में भी वृद्धि होगी।
कब-कब बढ़ा किराया
साल-------रेल मंत्री-------बढ़ोतरी 2013-14-------पवन कुमार बंसल-------2-10 पैसे प्रति किमी 2012-13------- दिनेश त्रिवेदी-------8-22 फीसदी, बाद में प्रस्ताव वापस लिया 2002-03-------नीतीश कुमार-------1-6 रुपये प्रति किमी
इसलिए था बढ़ाना जरूरी
भारतीय रेलवे हर महीने करीब 900 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही है। इसके अलावा रेलवे का आधारभूत ढांचा भी पुराना हो चला है और नए आधारभूत निर्माण के लिए रेलवे को पैसों की दरकार है।
रेल किराए में बढ़ोतरी कर रेलवे ने हर साल 8 हजार करोड़ रुपये की अतिरिक्त कमाई करने की योजना बनाई है।
'अच्छे दिन के ख्वाब दिखा कर बेवकूफ बनाया'
अजय माकन, कांग्रेस महासचिव ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा ‘रेलवे के इतिहास में इतना किराया कभी नहीं बढ़ा है। क्या ऐसे ही अच्छे दिन आएंगे? इस निर्णय से साफ पता चलता है कि मंत्रालयों में आपसी तालमेल नहीं है। यह फैसला बहुत ही दुर्भाग्यजनक है और इसे तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।’
पूर्व रेल मंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने कहा ‘आम चुनावों में भाजपा ने लोगों को अच्छे दिन के ख्वाब दिखाकर बेवकूफ बनाया और अब उनकी छाती पर रेल किराए वृद्धि के रूप में गोला दाग दिया है। आज तक किसी भी सरकार ने इतना किराया नहीं बढ़ाया।’
माकपा ने अपनी प्रतिक्रया में कहा ‘यह आम आदमी पर बेहद क्रूर आघात है। वे पहले ही पिछले कई साल से महंगाई के बोझ तले दबे हुए हैं। मोदी सरकार ने उन्हें राहत देने की बजाय उन पर अतिरिक्त बोझ डाल दिया।’
रेल किराये से लेकर सब्जियों के दाम बढ़ने को लेकर एक तरफ जहां कांग्रेस मोदी सरकार पर निशाना साध रही है तो दूसरी तरफ पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम मानते है कि महंगाई की कई वजहों पर सरकार का नियंत्रण नहीं होता है और हर सरकार को इसका सामना करना पड़ता है।
उन्होंने कहा कि महंगाई को काबू करने के लिए भी वर्तमान सरकार भी वही कदम उठा रही है जोकि हमने उठाए थे। उन्होंने कहा कि नई सरकार को महंगाई पर नियंत्रण के लिए समय देना चाहिए और ये गौर करने की बात होगी कि वे कैसे महंगाई कम करते है।