राजधानी ट्रेनों में मिलने वाली चादरों की क्वालिटी से परेशान यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। रेलवे उन्हें ट्रेनों में ‘यूज एंड थ्रो’ चादरें मुहैया कराएगा। आगामी रेल बजट में इसकी घोषणा की जा सकती है।
8 जुलाई को पेश होने वाले रेल बजट 2014-15 में शताब्दी ट्रेनों में स्वचालित दरवाजों और यात्री ट्रेनों में अग्नि शमन सिस्टम लगाने को भी हरी झंडी दिखाई जा सकती है। इसके अलावा उच्च स्तरीय मिल्क वैन और नमक के ट्रांसपोर्ट के लिए हल्के वजन वाले डिब्बों को तैयार करने की भी योजना है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की मांग को देखते हुए रेलवे ने बजट में स्टील कॉयल के ट्रांसपोर्ट के लिए उच्च स्तरीय डिब्बे बनाने की भी योजना बनाई है। योजना के मुताबिक रेलवे 3944 टन तक की क्षमता वाले कोच बनाएगा जबकि इसकी मौजूदा क्षमता 2346 टन है।
यात्रियों की बढ़ेगी सुरक्षा
पार्सल से ज्यादा राजस्व कमाने के उद्देश्य से रेलवे उच्च स्तरीय पार्सल वैन को विकसित करने की भी घोषणा कर सकता है। सूत्रों के मुताबिक रेल मंत्री सदानंद गौड़ा का पहला रेल बजट यात्रियों की सुविधा और उनकी सुरक्षा पर फोकस रहेगा।
ट्रेन में मिलने वाली चादरों की क्वालिटी को लेकर यात्रियों की शिकायत को देखते हुए राजधानी ट्रेनों में डिस्पोजेबल चादरों की योजना शुरू करने का फैसला किया गया है।
सूत्र ने कहा, ‘यात्रियों को पॉलिएस्टर के कपड़े वाली चादरें मुहैया कराई जाएंगी, जिन्हें इस्तेमाल के बाद फेंका जा सकता है। बंगलूरू राजधानी में इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया है। यात्रियों से मिले फीडबैक के बाद ही अन्य राजधानी ट्रेनों में इसे शुरू करने का फैसला किया गया है।’
रेलवे बनेगी हाई-फाई
रेलवे शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों में सुरक्षा के मद्देनजर ऑटोमैटिक डूर सिस्टम भी लागू करने जा रही है। यह सिस्टम ईएमयू ट्रेनों में भी लगाया जाएगा।
दुग्ध उत्पादों व दूध की बढ़ती मांग को देखते हुए रेलवे ने उच्च स्तर की मिल्क वैन भी बनाने की योजना बनाई है, जिसकी क्षमता 44,600 लीटर होगी। जबकि मिल्क वैन की मौजूदा क्षमता 40 हजार लीटर है।
हालांकि मिल्क वैन की क्षमता को बढ़ाया जा रहा है, लेकिन उसका वजन 37 टन से घटाकर 29.7 टन करने की योजना है।
बंगलूरू राजधानी में शुरू किया था प्रोजेक्ट
‘यूज एंड थ्रो’ चादरों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पहले ही बंगलूरू राजधानी एक्सप्रेस में शुरू किया जा चुका है। यात्रियों ने इस योजना को काफी सराहा है और उनके फीडबैक के बाद ही रेलवे ने अन्य राजधानी ट्रेनों में इसकी शुरुआत करने का फैसला किया है।
माल ढुलाई से कमाई पर नजर
रेलवे की नजरें माल ढुलाई से कमाई कर अपने घाटे को कुछ हद तक करने की भी है। रेल बजट में इसका खास ध्यान रखा गया है।
दुग्ध उत्पादों के ट्रांसपोर्ट के लिए मिल्क वैन की क्षमता को बढ़ाने के अलावा, स्टील उत्पादकों की मांग पर ज्यादा क्षमता वाले उच्च स्तरीय डिब्बे बनाने के प्रस्ताव को भी बजट में मंजूरी दी जाएगी। इसके अलावा पार्सल वैन के जरिए भी रेलवे कमाई की योजना बनाई बना रहा है।