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जानिए, 1 जुलाई से कितनी महंगी हो जाएगी सीएनजी?

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जून, 2013 में मनमोहन सिंह सरकार की आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने गैस की कीमतें 4.2 डॉलर प्रति एमबीटीयू से बढ़ा कर 8 डॉलर प्रति एमबीटीयू करने का फैसला किया। उस समय मनमोहन सिंह सरकार के इस फैसले की जोरदार आलोचना हुई थी।
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आलोचना में गुजरात सरकार काफी मुखर रही थी। गुजरात सरकार ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा था कि केंद्र सरकार ने गैस की कीमतें दोगुनी करके देश और राज्य के लोगों पर बड़ा वित्तीय बोझ डाल दिया है। उस समय गुजरात सरकार के प्रवक्ता और ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल ने कहा था कि गैस की कीमतें बढ़ने से गुजरात के लोगों पर 9,495 करोड़ रुपये का बोझ पड़ेगा।

ऐसे में पूरे देश पर इसके असर के बारे में आसानी से अनुमान लगाया जा सकता है। अब जून 2014 में नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सरकार सत्ता संभाल चुकी है।

1 जुलाई से नई गैस कीमतें होंगी लागू

मोदी सरकार गैस की कीमतें बढ़ाने के फैसले पर अमल करने जा रही है और उम्मीद है कि 1 जुलाई से नई गैस कीमतें लागू हो जाएंगी। लेकिन भारतीय जनता पार्टी का कोई नेता या सौरभ पटेल गैस कीमतों पर नहीं बोल रहे हैं।

सौरभ पटेल चुप हैं और गैस कीमतें बढ़ने से देश भर में आम आदमी पर पड़ने वाले इसके प्रभाव के बारे में कोई बात नहीं हो रही है। सत्ता में रहने की मजबूरियां और कमजोर अर्थव्यवस्था में वित्तीय संसाधनों का प्रबंधन करने की चुनौती ने भारतीय जनता पार्टी और उनके सहयोगियों के लिए स्थितियां बदल दी हैं।

अब भारतीय जनता पार्टी में गैस कीमतों की समीक्षा करने की बात कोई नहीं कर रहा है, जबकि तत्कालीन मुख्य प्रवक्ता और अब कानून एवं दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गैस कीमतों की समीक्षा का वादा किया था। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और वित्त मंत्री अरुण जेटली ने भी कहा था कि अगर एनडीए सत्ता में आता है तो गैस कीमतों की समीक्षा की जाएगी।

यशवंत सिन्हा सम‌िति की रिपोर्ट को जाएगा माना

इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी ने कहा था कि वह यशवंत सिन्हा की अगुवाई वाली संसदीय स्थाई समिति की रिपोर्ट को मानेगी। समिति ने गैस कीमतों और रंगराजन फार्मूले की तुरंत समीक्षा करने को कहा था।

1 जुलाई को जारी होने वाली नई गैस कीमतों की संभावित अधिसूचना पावर और उर्वरक सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर डालेगी और उपभोक्ताओं और किसानों को इन चीजों के उपभोग के लिए ज्यादा भुगतान करना होगा।

औद्योगिक उपभोक्ताओं को गैस के लिए 1-2 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू ज्यादा भुगतान करना होगा। आम उपभोक्ता भी इससे बुरी तरह से प्रभावित होंगे। उपभोक्ताओं को बिजली, सीएनजी और खाना बनाने के लिए पीएनजी के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे।
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8-9 रुपए प्रति किलोग्राम गैस होगी महंगी

ऊर्जा मंत्रालय ने गैस की कीमतें दोगुनी करने का बार-बार विरेध किया है। मंत्रालय का कहना है कि हम 5 डॉलर प्रति एमएमबीटीयू से ज्यादा गैस कीमत के पक्ष में नहीं हैं।

जून 2013 के बाद रुपया काफी कमजोर हुआ है, ऐसे में गैस कीमत एक डॉलर बढ़ने का मतलब है कि बिजली 70 पैसे से 1 रुपये प्रति यूनिट महंगी होगी। वाहन चलाने में ईंधन के तौर पर सीएनजी का इस्तेमाल करने वालों को प्रति किलो 8-9 रुपये प्रति किलोग्राम ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।

वहीं पीएनजी की कीमत 1.5 रुपये से 2 रुपये प्रति स्टैंडर्ड क्यूबिक मीटर महंगी हो सकती है। गेल इंडिया और पेट्रोकेमिकल व एलपीजी कारोबार से जुड़ी कंपनियों की लागत बढ़ जाएगी। गैस कीमतों में वृद्धि का बड़ा असर उर्वरक सब्सिडी पर भी होगा।
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