बचत की रकम का निवेश कर दौलत खड़ी करने की ख्वाहिश कई बार तेजी से बढ़ती महंगाई के आगे धराशाई होकर रह जाती है। इसका कारण होता है पारंपरिक निवेश योजनाओं मिलने वाले रिटर्न का महंगाई के आगे बौना साबित होना।
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ऐसे में निवेश पर तगड़ा रिटर्न पाने का एक कारगर रास्ता है बाजार से जुड़े निवेश में पैसा लगाना, पर इसमें बाजार से जुड़े जोखिम भी शामिल होते हैं। म्यूचुअल फंड इसमें आम निवेशकों के लिए काफी सुविधाजनक विकल्प साबित होता है क्योंकि इसका संचालन पेशेवर फंड मैनेजरों के जरिए किया जाता है, जिससे निवेशकों के लिए जोखिम काफी कम हो जाता है।
भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 1 अप्रैल से म्यूचुअल फंड हाउसों के लिए नए नियम लागू कर इस विकल्प को और बेहतर, सुविधाजनक और पारदर्शी बना दिया है। सेबी के नए नियमों से जहां म्यूचुअल फंडों के संचालन में और स्पष्टता आएगी, वहीं इससे फंड हाउसों और निवेशक दोनों ही को कई तरह की सहूलियतें मिल रही हैं।
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फंड हाउसों को करना होगा निवेश का खुलासा
सेबी के नए नियमों के तहत अब म्यूचुअल फंड हाउसों को अब हर माह अपने निवेश यानी ऐसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) का ब्योरा जारी करना होगा। इसके तहत हर फंड हाउस को बताना होगा कि इक्विटी और डेट विकल्पों में उसने कहां-कहां और कितना-कितना निवेश किया है।
सेबी ने यह निर्देश फंड के एलोकेशन और संचालन को और पारदर्शी बनाने के लिए उठाया है। इस नियम के तहत म्यूचुअल फंड हाउसों को हर महीने की 7 तारीख को अपने एयूएम का ब्योरा जारी करना होगा। यह विवरण फंड हाउस की वेबसाइट के साथ-साथ म्यूचुअल फंड सेक्टर की प्रमुख संस्था एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड ऑफ इंडिया (एएमएफआई) की साइट पर भी उपलब्ध होगा।
इसे देखकर निवेशकों को पता लग जाएगा कि फंड हाउस किस तरह की निवेश रणनीति अपना रहा है। इस आधार पर उनके लिए यह फैसला करना आसान हो जाएगा कि उस फंड में निवेश करें या नहीं। नए नियमों के तहत फंड हाउसों को 7 अप्रैल को पहला विवरण जारी करना था, पर सेबी ने उन्हें एक सप्ताह की मोहलत देते हुए ब्योरा जारी करने की तारीख को 14 अप्रैल कर दिया है।
नए नियमों के तहत इसका भी खुलासा किया जाएगा कि म्युचुअल फंडों ने अपने समूह कंपनियों या अन्य से कितनी राशि जुटाई है। इसके अलावा स्पॉसर व एसोसिएट से जुटाए गए एयूएम व उनके अलावा जुटाए एयूएम की जानकारी भी फंड को देनी होगी। फंड हाउसों को अपने एयूएम में खुदरा निवेशकों और कॉरपोरेट निवेशकों के योगदान का विवरण देने के साथ ही इक्विटी और डेट में इसके निवेश का भी स्पष्ट ब्योरा जारी करना होगा।
कंपनियों में वोटिंग राइट्स का करना होगा खुलासा
नए नियमों में एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अब फंड हाउसों को उनके निवेश वाली विभिन्न कंपनियों में अपने मताधिकार यानी वोटिंग राइट्स का भी खुलासा करना होगा। इसके तहत फंडों को कंपनियों में अपने मताधिकार के इस्तेमाल और वोटिंग के पीछे जुड़े तर्क के बारे में भी निवेशकों को बताना होगा।
फंड हाउसों को यह ब्योरा तिमाही आधार पर जारी करना होगा। इससे निवेशकों को यह पता चल सकेगा कि जिन कंपनियों में उनका पैसा लगाया गया है उनके संचालन में फंड हाउसों की कितनी और कैसी भूमिका है।
सेबी ने इस नियम के जरिए वास्तव में फंड हाउसों को अपने निवेश वाली कंपनियों के कॉरपोरेट गवर्नेंस में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित किया है। अब तक प्राय: फंड हाउस कंपनियों में अपने वोटिंग राइट्स की घोषणा नहीं करते थे और इसका खुलासा न हो, इसके लिए अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने में भी गुरेज करते थे।
ऐसे में इन कंपनियों में अच्छा खासा निवेश करने के बावजूद इनकी नीतियों और संचालन में उनकी कोई प्रत्यक्ष भूमिका नहीं रहती थी। वोटिंग राइट्स की घोषणा का नियम अब उन्हें कंपनियों के गवर्नेंस में सक्रिय भूमिका निभाने का मौका देगा। यह निवेशकों के लिए काफी बेहतर होगा, क्योंकि फंड हाउसों के जरिए उन्हीं की रकम इन कंपनियों में लगी होती है।
सेबी का यह नियम म्यूचुअल फंड में निवेश को और आकर्षक बनाने और ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को इससे जोड़ने की दीर्घकालिक नीति का हिस्सा है। बाजार विशेषज्ञों ने सेबी के इस कदम का स्वागत किया है। उनका मानना है कि इससे खुदरा निवेशक म्यूचुअल फंडों में निवेश के लिए आकर्षित होंगे।
छोटे शहरों में बढ़ेगी फंडों की लोकप्रियता
नए नियमों के तहत अब म्यूचुअल फंड्स को देश के टॉप-15 शहरों के अलावा अन्य शहरों से जुटाई गई राशि (एयूएम) का ब्योरा देना होगा। इसके तहत उन्हें बी-15 और टी-15 श्रेणी के तहत आने वाले शहरों से जुटाई गई रकम का सिलसिलेवार ढंग से विवरण उपलब्ध कराना होगा।
इस नियम से फंड हाउसों के लिए अपना दायरा देश के छोटे शहरों में बढ़ाने का दबाव बढ़ेगा, जिसके लिए सेबी काफी समय से प्रयास करता आ रहा है। दूसरी ओर यह जानकारी ऐसे शहरों की म्यूचुअल फंडों में निवेश के रुझान को भी बढ़ाएगी।
छोटे शहरों के लोगों को म्यूचुअल फंड से जोड़ने के लिए सेबी ने फंड हाउसों को क्षेत्रीय भाषाओं में अपना प्रचार करने को भी कहा है। इससे इन क्षेत्रों के लोगों के लिए म्यूचुअल फंडों में निवेश को समझना आसान हो सकेगा।
सेबी ने फंड हाउसों को देश में अपने कारोबार के विस्तार के लिए वैकल्पिक डिस्ट्रीब्यूशन चैनलों का इस्तेमाल करने को कहा है। इसके तहत फंड हाउसों सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू बैंक) को एक वैकल्पिक चैनल के रूप में इस्तेमाल करते हुए देशभर में फैली इन बैंकों की शाखाओं के जरिए म्यूचुअल फंड सुझाव दिया है।
सेबी की इस पहल के पीछे म्यूचुअल फंडों से देश के छोटे शहरों, अर्ध शहरी इलाकों, कस्बों और गांवों के लोगों को म्यूचुअल फंड में निवेश से जोड़ना है। इसक अलावा फंड हाउसों से ऑन लाइन चैनल का इस्तेमाल करने को भी कहा गया है। सेबी ने कहा कि ऑनलाइन चैनल का इस्तेमाल करके न केवल ग्राहकों की संख्या बढ़ाई जा सकती है, बल्कि म्यूचुअल फंडों के विस्तार की गति को भी काफी तेज किया जा सकता है।
इसके अलावा युवा निवेशकों की म्यूचुअल फंडों में रुचि बढ़ाने में भी ऑनलाइन चैनल काफी मददगार साबित होगा, क्योंकि युवाओं में इंटरनेट का चलन काफी तेजी से बढ़ रहा है। सेबी ने ऑनलाइन चैनल के तहत फंड हाउसों से अपनी वेबसाइट पर फंड की ऑनलाइन खरीदारी की सुविधा उपलब्ध कराने को कहा है।
सेबी ने देश में तेजी से बढ़ते मोबाइल के जरिए इंटरनेट के इस्तेमाल को एक बेहतर मौका बताते हुए फंड हाउसों से ऑनलाइन माध्यम पर खासतौर पर जोर देने को कहा है।