वित्तीय संकट के चलते पिछले तीन महीने से थमी किंगफिशर एयरलाइंस के दोबारा उड़ान भरने की थोड़ी उम्मीद जगी है। सोमवार को कंपनी ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) को एक रिवाइवल प्लान दिया है। माना जा रहा है कि यूबी समूह दोबारा संचालन शुरू करने के लिए 652 करोड़ रुपये किंगफिशर में लगाने को तैयार है।
किंगफिशर के इस कदम को आगामी 31 दिसंबर को खत्म हो रहे फ्लाइंग लाइसेंस को बचाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। गत 20 अक्टूबर को डीजीसीए ने लंबी तालाबंदी के बाद किंगफिशर के फ्लाइंग लाइसेंस को निलंबित कर दिया था।
डीजीसीए सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, किंगफिशर एयरलाइंस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी संजय अग्रवाल ने सोमवार को डीजीसीए से मिलकर कंपनी की वित्तीय तैयारियों की जानकारी दी है। वित्तीय तैयारियों पर डीजीसीए ने कंपनी को और स्पष्ट योजना पेश करने को कहा है। उल्लेखनीय है कि 31 दिसंबर से पहले सभी घरेलू एयरलाइंस अपने फ्लाइंग लाइसेंस के नवीनीकरण के लिए आवेदन करती हैं, लेकिन किंगफिशर के मामले में रिवाइवल प्लान भेजना जरूरी था।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में बैंकों द्वारा नया कर्ज देने से इनकार के बाद किंगफिशर एयरलाइंस ने आंतरिक स्रोतों से 425 करोड़ रुपये लगाकर कुछ उड़ानें शुरू करने की बात कही थी। उधर, डीजीसीए भी स्पष्ट कर चुका है कि जब कंपनी पुख्ता योजना सामने नहीं रखती, इसे दोबारा उड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती है।
कर्मचारियों के कई महीने से बकाया वेतन के अलावा किंगफिशर को एयरपोर्ट अथॉरिटी, सेवा कर विभाग, एयरक्राफ्ट लीज पर देने वाली कंपनियों और बैंकों की भारी देनदारी चुकानी है। डीजीसीए के अधिकारियों का कहना है कि रिवाइवल प्लान को देखते के बाद ही किंगफिशर के बारे में आगे कोई फैसला किया जाएगा।
नागर विमानन मंत्रालय इस पूरे मामले पर नजर रखे हुए है। मंत्रालय के आला अधिकारियों का कहना है कि एयरलाइंस की देनदारी चुकाने और कर्मचारियों को वेतन देने के अलावा संचालन शुरू करने के लिए भारी निवेश की जरूरत है। डीजीसीए इन सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही दोबारा उड़ान भरने अनुमति देगा।
फिलहाल कंपनी पर 17 बैंकों का करीब 8 हजार करोड़ रुपये का कर्ज है जबकि कंपनी का घाटा भी करीब 7 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा है। एयरपोर्ट अथॉरिटी और सेवा कर विभाग भी अपने बकाया भुगतान के लिए कंपनी पर दबाव बना रहे हैं।