कर्ज में डूबी हुई विमानन कंपनी किंगफिशर ने अपने लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की राह और आसान बनाते हुए कंपनी में विदेशी संस्थागत निवेश (एफआईआई) की अधिकतम सीमा 3 फीसदी निर्धारित कर दी है। बदहाली से उबरने के लिए किंगफिशर इक्विटी निवेश के लिए कई निवेशकों से बातचीत कर रही है।
आसमान से जमीन पर आ चुकी विजय माल्या की किंगफिशर ने कहा है कि लेनदेन के लिए कंपनी के पूंजीगत ढांचे में तेजी लाने के उद्देश्य से उसने एफआईआई की सीमा निर्धारित की है। ताकि भविष्य में यह सभी शेयरधारकों के लिए लाभदायक हो सके।
बीएसई की दी सूचना में कंपनी ने कहा है कि तत्काल प्रभाव से किसी भी संस्थागत विदेशी निवेश को, पात्र विदेशी निवेशक या अन्य गैर रणनीतिक विदेशी निवेश (एनआरआई निवेश को छोड़कर), उसके मौजूदा स्तर 3 फीसदी के अधिक निवेश की अनुमति नहीं होगी।
एफआईआई के निवेश की सीमा के स्तर को स्टाक एक्सचेंज के निर्देशों के अनुसार समय-समय पर निर्धारित किया जा सकता है। सितंबर तिमाही के अंत तक किंगफिशर में विदेशी निवेशकों की होल्डिंग 2.46 फीसदी थी। घरेलू विमानन में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अधिकतम सीमा फिलहाल 49 फीसदी तय की गई है।