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खादी की कीमत होगी बाजार के हवाले

Mon, 10 Dec 2012 09:30 PM IST
नई दिल्ली/प्रशांत श्रीवास्तव
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आजादी की लड़ाई की प्रतीक खादी को अब नए कलेवर में आपके सामने लाने की तैयारी है। इसके तहत खादी की बिक्री जहां निजी कंपनियों के द्वारा होगी, वहीं इसे खरीदने के लिए भी आपको ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी। यानी खादी पर मिलने वाली छूट (रिबेट) आने वाले दिनों में आपको नहीं मिलेगी।
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सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय की नई योजना के अनुसार देश में खादी की बिक्री को सार्वजनिक-निजी-भागीदारी (पीपीपी) के तहत निजी कंपनियों के हाथों में सौंप दिया जाएगा। नई कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी निजी कंपनी की होगी, जबकि 49 फीसदी हिस्सेदारी सरकार की होगी।  

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इसके तहत देश भर में 20 खादी आउटलेट खोलने की प्रारंभिक योजना है। जिस संबंध में तीन कंपनियों को अंतिम चयन के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया है। अधिकारी ने बताया कि सरकार निजी कंपनियों के जरिए जहां खादी में निवेश बढ़ाना चाहती है, वहीं खादी को आधुनिक लुक भी देना चाहती है। जहां तक खादी पर मिलने वाली छूट की बात है, तो वह पीपीपी मॉडल के बाद नहीं रह जाएगी। कीमत पूरी तरह कंपनियों के जरिए निर्धारित होगी।
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खादी ग्रामोद्योग के कर्मचारियों के भविष्य पर अधिकारी ने बताया कि कर्मचारियों को विकल्प दिए जाएंगे। इसमें जो कर्मचारी कंपनी के साथ जुड़ना चाहेंगे, उन्हें वहां जाने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, जो खादी ग्रामोद्योग के तहत रहना चाहते हैं, उन्हें सरकार अपने तहत रखेगी।

अधिकारी ने बताया कि पीपीपी मॉडल से जहां खादी उत्पाद बनाने वाले कारीगरों को ज्यादा कीमत मिलेगी, वहीं उनको वैश्विक स्तर पर भी पहले से ज्यादा महत्व मिलेगा। केंद्र सरकार एशियन डेवलपमेंट बैंक के साथ किए गए समझौते के तहत खादी के मौजूदा बिजनेस मॉडल में बदलाव कर रही है।

समझौते के तहत सरकार को खादी के रिफार्म के लिए 15 करोड़ डॉलर की राशि मिली है। इसी के तहत सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय ने साल 2011 में कंपनियों से आवेदन मांगे थे। आवेदन के बाद शॉपर्स स्टॉप, फैब इंडिया सहित तीन कंपनियों का अंतिम चरण के लिए चयन किया गया है। इन कंपनियों में से एक कंपनी को खादी आउटलेट्स की जिम्मेदारी दी जाएगी। अभी देश भर में केवीआईसी के 350-400 कर्मचारी और 7,000 के करीब खादी संस्थान हैं।
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