उद्योग संगठन फिक्की ने कहा है कि घरेलू और विदेशी निवेशकों के बीच बेहतर माहौल विकसित करने के लिए जरूरी है कि देश के मौजूदा कर नियमों में और अधिक पारदर्शिता लाई जाए। कर नियमों का निवेशकों को प्रभावित करने में अहम रोल होता है।
फिक्की के प्रेसिडेंट आरवी कनोरिया ने बजट पूर्व मांगों की सूची वित्त मंत्रालय में राजस्व सचिव सुमित बोस को सौंपते हुए कहा कि देश में निवेश का बेहतर माहौल विकसित करने के लिए एक स्थिर और अनुकूल कर प्रावधानों की जरूरत होती है। निवेश के लिहाज से भारत दुनिया में एक बेहतर देश है। ऐसे में आगामी बजट में सरकार को निवेशकों की प्राथमिकताओं को देखते हुए कर नियमों में और स्पष्टता और पारदर्शिता लाई जानी चाहिए। उन्होंने बजट पूर्व मांग पत्र में कुछ प्रमुख समिति की लंबित पड़ी सिफारिशों को लागू करने और विधेयकों पर कदम आगे बढ़ाने की अपील की है।
फिक्की ने अपने मांगपत्र में कहा है कि जनरल एंडी अवायडेंस रूल्स (गार) पर शोम समिति की सिफारिशें को लागू किया जाना चाहिए। इनमें विलंब करना निवेश के लिए प्रतिकूल साबित हो सकता है। इसके अलावा, आरवी कनोरिया ने वित्त मंत्रालय से कहा है कि आगामी बजट में सर्विस या एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने पर प्रस्ताव नहीं होना चाहिए।
इसके साथ ही फिक्की ने सुझाया है कि विरासत में मिली संपत्ति पर टैक्स लगाने के फैसले में जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए। संपत्ति कर भी जल्दबाजी में न लगाया जाए। उद्योग संगठन ने मांग की है कि विदेशी कंपनियों के लाभांश पर कर नहीं लगाना चाहिए। इसके अलावा, फिक्की ने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को जल्द से जल्द लागू करने की मांग की है।
संगठन ने सेवा कर को लेकर जारी निगेटिव सूची (1 जुलाई 2013 से प्रभावी) को जीएसटी की दिशा में प्रमुख कदम बताया है। इसके साथ ही जीएसटी लागू होने तक बेसिक सीमा शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया है।