भारत के शहरी क्षेत्रों में ट्रैफिक जाम एक बड़ी चुनौती के रूप में उभर रहा है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी आबादी वाला देश इसे व्यवस्थित करने में असहाय प्रतीत हो रहा है। यहां शहर नियोजित नहीं है, लेन ड्राइविंग की कोई अवधारणा नहीं है, फुटपाथ का भी ढांचा पुख्ता नहीं है। 2014 में यातायात प्रबंधन का बाजार 3.56 अरब डॉलर पर पहुंचने का अनुमान है। 2019 तक यह 16.89 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। 2014 से 2019 के बीच इसकी सालाना औसत ग्रोथ 36.5 फीसदी रह सकती है। जापान की जीरो-सम आईटीएस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह राज्य गुजरात में बतौर पायलट प्रोजेक्ट एक कुशल यातायात सोल्यूशन लागू करने जा रही है। पहला प्रोजेक्ट अहमदाबाद में अधिकारिक रूप से अक्तूबर में लांच किया जाएगा।
यह देश में अपनी तरह का पहला पायलट प्रोजेक्ट है, जहां जांची-परखी गई जापानी तकनीक इस्तेमाल में लाई जाएगी। जीरो-सम आईटीएस नागोया इलेक्ट्रिक वर्क्स लिमिटेड के साथ मिलकर कार्य कर रही है, जिसे इस प्रोजेक्ट के लिए जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) फंड उपलब्ध करा रहा है। जीरो-सम आईटीएस के प्रबंध निदेशक चिकारा किकुची ने अमर उजाला के सुजय मेहदूदिया से गुजरात में इस प्रोजेक्ट के बारे में विस्तार से बातचीत की। पेश हैं प्रमुख अंश -
सवाल : भारत में ट्रैफिक जाम की समस्या कितनी विकट है?
जवाब : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 100 स्मार्ट शहर बनाने का वायदा है, जो इको-फ्रेंडली शहर हों तथा लोक सेवाओं की प्रभावी तरीके से डिलीवरी और बुनियादी ढांचे के लिए नई सूचना एवं संचार तकनीक (आईसीटी) का इस्तेमाल करें। आज देश में ट्रैफिक जाम एक बड़ी शहरी चुनौती है। यहां शहर नियोजित तरीके से नहीं बसाए गए हैं। लेन में गाड़ी चलाने का कोई कांसेप्ट नहीं है, रीयल टाइम ट्रैफिक अलर्ट की कोई सुविधा नहीं है, इन तमाम दिक्कतों का असर शहरों की उत्पादकता और राजस्व पर पड़ रहा है।
सवाल : इसके लिए भारत में उपलब्ध कुशल ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस) टेक्नोलॉजी सोल्यूशन क्या है? जीरो-सम आईटीएस क्या सुविधाएं उपलब्ध कराएगी?
जवाब : भारत में आईटीएस सेक्टर अभी भी बहुत नया है। हालांकि, विकसित देशों में कई सारी तकनीकों को सफलतापूर्वक प्रभावी बनाया गया है, फिर भी भारत में इसी तरह की व्यवस्था में कई सारी दिक्कतें हैं। भारत में राष्ट्रीय स्तर पर आईटीएस स्थापत्य व बनावट के नियमन और निश्चित दिशानिर्देशों की कमी है। दूसरे देशों में आईटीएस सोल्यूशन की सफलता के आधार पर ही इसे भारत के लिए भी मॉडल नहीं बनाया जा सकता है। इसकी मुख्य वजह भारत में गाड़ी चलाने का व्यवहार और स्थितियां हैं। भारत में एक आईटीएस सोल्यूशन को कम खर्चीला, सहज रूप से प्रभावी, कम मानवीय हस्तक्षेप वाला बनाने की जरूरत है। ट्रैफिक पुलिस में जमीनी स्तर पर कुशल लोगों की अनुपलब्धता के चलते इस तकनीक में मानवीय दखल कम करना जरूरी है। इसके साथ ही इस तकनीक को लोगों की स्थानीय भाषा में लागू किया जाना चाहिए। जीरो-सम आईटीएस सोल्यूशन ने इस तमाम दिक्कतों का समाधान निकाला है और उसके अनुसार तकनीक विकसित की है। इसमें भारतीय स्थितियों के अनुरूप सबसे बेहतर कारोबारी मॉडल और तकनीक को शामिल किया गया है। हमारा आईटीएस सोल्यूशन सड़क पर वाहनों की सूचनाएं जुटाने के लिए एक हाइब्रिड मॉडल का इस्तेमाल करता है। इसमें कैमरा आधारित ट्रैफिक सेंसर और वाहनों से जीपीएस सूचनाएं जुटाई जाती हैं। डाटा प्राप्त करने और ट्रांसमिशन के लिए मोबाइल कम्युनिकेशन का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कि प्रत्येक सेंसर या वीएमएस (वेरिएबल मैसेजिंग साइन लोकेशन) पर इंटरनेट केबल बिछाने की जरूरत नहीं पड़ती है। क्लाउड आधारित कंट्रोल सेंटर के जरिए फिजिकली संचालित कंट्रोल सेंटर बनाने की जरूरत नहीं रह जाती है। इसके अलावा, आपात स्थिति में शहर के किसी भी हिस्से से पुलिसकर्मी टैबलेट के जरिए स्थिति को नियंत्रित करने में सक्षम होगा।
सवाल : आईटीएस अप्लीकेशन किसी शहर में कैसे मदद करेगा?
जवाब : इसकी प्लानिंग तीन तरीके से होती है। पहला मीडियम-शार्ट टर्म, इसमें कम पूंजी की जरूरत होती है और इसका असर तत्काल दिखाई देता है। दूसरा मीडियम टर्म, इसमें पर्याप्त पूंजी की जरूरत होती है और लोगों द्वारा निरंतर ड्राइविंग व्यवहार बदलने पर इसका प्रभावी होना निर्भर करता है। और तीसरा, लांग टर्म इसमें सरकार की तरफ से भारी निवेश की जरूरत होती है और इसके प्रभावी होने में समय लगता है। जीरो-सम आईटीएस का फोकस मीडियम-शार्ट टर्म प्रणाली पर है। जीरो-सम द्वारा लागू किए जाने वाले आईटीएस सोल्यूशन का मुख्य उद्देश्य रोड यूजर्स को अधिक जानकारियां उपलब्ध करा बेहतर यातायात प्रबंधन सुनिश्चित करना है। इससे लोग यात्रा अच्छी तरह से प्लान करने में सक्षम हो सकेंगे, उनकी यात्रा का समय कम लगेगा, ईंधन की बचत होगी और व्यस्त सड़कों पर जाम से निजात मिल सकेगी।
सवाल : अहमदाबाद में ट्रायल आईटीएस प्रोजेक्ट के बारे में बताएं?
जवाब : देश में अपनी तरह का यह पहला पायलट प्रोजेक्ट है, जहां जांची-परखी जापानी तकनीक इस्तेमाल में लाई जा रही है। जीरो-सम आईटीएस नागोया इलेक्ट्रिक वर्क्स लिमिटेड के साथ मिलकर कार्य कर रही है, जिसे इस प्रोजेक्ट के लिए जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी (जेआईसीए) फंड उपलब्ध करा रहा है। जीरो-सम आईटीएस सोल्यूशन का प्रमुख उद्देश्य यह दिखाना है कि अहमदाबाद शहर में ट्रैफिक जाम की समस्या से निजात पाने के लिए कैसे तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। एक बार यह तकनीक प्रभावी हो गई, तो अन्य शहरों में भी ट्रैफिक की स्थिति बेहतर बनाने वाली प्रणाली के रूप इसका प्रदर्शन किया जाएगा।