विदेशों में कालाधन जमा करने वाले या इस धन से वहां संपत्ति खरीदने वालों के लिए एक बार जुर्माना चुका कर संपत्ति की घोषणा करने की योजना सरकार ने भले ही शुरू कर दी हो, लेकिन इसके सफल होने के आसार कम ही नजर आ रहे हैं।
काला धन और इससे जुड़े कराधान के मामले देखने वाले कर विशेषज्ञों का कहना है कि इस योजना के नियम जटिल बना दिए गए हैं, इस वजह से इसे ज्यादा सफलता न मिलने की संभावना है। चार्टर्ड अकाउंटेंटों और कर विशेषज्ञों की राय में इस योजना की सफलता में सबसे बड़ा रोड़ा विदेशों में खरीदी गई संपत्ति के लिए उसके बाजार मूल्य के 60 फीसद राशि के बराबर भारत में टैक्स चुकाने के प्रावधान के चलते लग सकता है।
काले धन से संबंधित मामले देखने वाले एक वरिष्ठ चार्टर्ड अकाउंटेट ने नाम जाहिर न करने की शर्त पर बताया कि इसकी सबसे बड़ी खामी विदेशी परिसंपत्ति के लिए 60 फीसदी नकद में टैक्स मांगना है।
90 दिन की अवधि काफी कम
उन्होंने एक उदाहरण के जरिये समझाया कि किसी व्यक्ति ने काले धन से लंदन में एक बंगला खरीदा और उसका वर्तमान बाजार मूल्य भारतीय मुद्रा में 100 करोड़ है।
वह यदि इस योजना का लाभ लेना चाहता है तो उसे यहां बाजार मूल्य की 60 फीसद राशि, मतलब 60 करोड़ रुपये जमा करना होगा। यहां सवाल उठता है कि जिसके पास 100 करोड़ का बंगला हो, उसके पास 60 करोड़ रुपये की नकदी हो, यह जरूरी नहीं है। यदि उनके पास नकदी नहीं होगी तो वह भारत में टैक्स कैसे चुकाएगा।
नियमों से यह भी पता नहीं चलता है कि बैंक इसके लिए लोन देगा या नहीं। एक अन्य चार्टर्ड अकाउंटेंट का कहना है कि नियमानुसार जिस देश में संपत्ति है, वहां की सरकार के अप्रूव्ड वैल्यूअर से संपत्ति का वैल्यूएशन करवाना होगा। इसके लिए कुल मिलाकर 90 दिन का समय दिया गया है। उनका कहना है कि विदेशों में संपत्ति इवेल्यूएशन की प्रक्रिया बहुत सख्त है।
वैल्यूअर संपत्ति को कई बार विजिट करते हैं। संपत्ति के मूल्य निर्धारण के लिए वह कई प्राधिकरणों से भी पूछताछ करते हैं। ऐसे में 90 दिन की अवधि काफी कम लगती है। सरकार को इस दिशा में भी ध्यान देना चाहिए।
तंग करेंगे आयकर अधिकारी
उन्होंने इस बात की भी आशंका जाहिर की कि आयकर अधिकारी घोषित संपत्ति को लेकर करदाता को आगे भी तंग कर सकते हैं। उनके मुताबिक जब एक बार कोई संपत्ति घोषित हो गई, तो वहां से आने वाले किराए को यहां डीम्ड इनकम माना जा सकता है, भले ही वहां मकान खाली ही क्यों न हो।
भारतीय आयकर कानून के मुताबिक कोई व्यक्ति एक ही मकान को किराए पर नहीं दिखा सकते हैं, जबकि शेष मकानों के किराये को डीम्ड इनकम मान लिया जाता है।
ऐसे में आयकर अधिकारी यह तर्क देते हैं कि जब विदेशी संपत्ति (मकान) की कीमत 100 करोड़ रुपये है तो उसका किराया भी तो ज्यादा होगा। उसी हिसाब से यहां टैक्स भी भरना होगा।