कर्नाटक और गुजरात द्वारा ट्रांसमिशन और वितरण कंपनियों के लिए बिजली के ओपन एक्सेस (खुले उपयोग) का विरोध करना एक प्रतिगामी कदम है। कट्स इंटरनेशनल का कहना है कि इसका भारतीय ऊर्जा क्षेत्र के विकास के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ताओं के हितों पर भी नकारात्मक असर पड़ेगा।
कट्स इंटरनेशनल के महासचिव प्रदीप मेहता ने एक बयान में कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 42 के अंतर्गत उपभोक्ताओं को प्रतिस्पर्धी दरों पर बिजली खरीदने के अधिकार से रोका नहीं जा सकता है। प्रतिस्पर्धा में जो कंपनी किफायती दर पर बिजली की आपूर्ति करेगी, उपभोक्ता उसका चयन कर सकते हैं।
अधिनियम की धारा 42, 49 और 86 के मुताबिक नियामक 1 मेगावाट से अधिक की बिजली खपत करने वाले उपभोक्ताओं के लिए दरें फिक्स नहीं कर सकते हैं। उन्हें बाजार द्वारा तय मूल्य पर बिजली खरीदनी पड़ेगी। इससे बड़े उपभोक्ताओं खासकर कपड़ा, सीमेंट और स्टील कंपनियों के लिए प्रतिस्पर्धी दरों पर नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि इन प्रावधानों से ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता को प्रोत्साहन मिलता है। इसके अलावा, यह ऊर्जा क्षेत्र के साथ-साथ उपभोक्ताओं के हित में है। ओपन एक्सेस से बिजली की कमी कम करने और अतिरिक्त क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है।