इराक संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये में जारी गिरावट के बीच सरकार के लिए महंगाई पर अंकुश लगा पाना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में तेल के आयात की बढ़ती लागत जुलाई में पेश होने वाले मोदी सरकार के पहले आम बजट पर दबाव बढ़ा सकती है।
वाणिज्य एवं उद्योग संगठन एसोचैम की एक रिपोर्ट के मुताबिक इराक में भड़की हिंसा के चलते आपूर्ति बाधित होने से ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल कीमत 115 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर निकल गई हैं।
ऐसे हालात में परिवहन खर्च में बढ़ोतरी होने से सरकार के महंगाई पर लगाम लगाने और आर्थिक विकास की रफ्तार तेज करने के दावों को जबरदस्त झटका लग सकता है।
इसके साथ ही सरकार के लिए चालू खाते के घाटे पर नियंत्रण पाना भी मुश्किल होता जा रहा है, जोकि आगामी बजट पर दबाव बढ़ा सकता है।
हालांकि रिपोर्ट में यह भी उम्मीद जताई गई है कि आर्थिक सुधार के लिए प्रयासरत सरकार की ओर से उठाए जा रहे आवश्यक कदम अगर निवेशकों का विश्वास बनाए रखने में कामयाब रहते हैं, तो आने वाले समय में अर्थव्यवस्था के साथ ही रुपये में भी मजबूती देखने को मिल सकती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि इराक में जारी हिंसा के चलते तेल आयात की बढ़ती लागत को देखते हुए देश की तेल विपणन कंपनियां पेट्रोल की कीमत बढ़ा सकती हैं। ऐसे में सरकार के लिए जरूरी है कि वह कीमत बढ़ोतरी को कुछ समय के लिए टाल दे, नहीं तो परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई पर लगाम लगा पाना काफी मुश्किल होगा।