पेट्रोलियम पदार्थों का विपणन करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी इंडियन आयल कारपोरेशन (आईओसी) ने मथुरा रिफाइनरी के विस्तार कार्य से हाथ खींच लिया है। बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश सरकार से इंट्री टैक्स के मसले पर राहत नहीं मिलने की वजह से ऐसा कदम उठाया गया है।
आईओसी की मथुरा रिफाइनरी में इस समय साल में 8 एमएमटी कच्चे तेल का शोधन होता है। वहां जब रिफाइनरी लगी थी, तब कोई इंट्री टैक्स नहीं लगता था। लेकिन बाद में उत्तर प्रदेश इंट्री टैक्स कानून २००७ अस्तित्व में आया और इसी के आधार पर मथुरा में शोधन होने वाले रिफाइनरी पर कंपनी से इंट्री टैक्स की मांग की गई। यह मामला इलाहाबाद उच्च न्यायालय होते हुए उच्चतम न्यायालय तक जा पहुंचा और कंपनी को पुरानी तारीख से इंट्री टैक्स का भुगतान करना पड़ा।
इसी वर्ष अगस्त के दूसरे सप्ताह में उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव आलोक रंजन ने एक बयान जारी कर जानकारी दी थी कि आईओसी ने मथुरा रिफाइनरी के विस्तार की परियोजना के लिए ८७०० करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की है। विस्तार के बाद रिफाइनरी की क्षमता सालाना ८ से ११ एमएमटी हो जाएगी। इससे प्रदेश में १०००० युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।
लेकिन अब स्थिति प्रतिकूल हो गई है। आईओसी का कहना है कि अब पेट्रोल के साथ-साथ डीजल की कीमतें भी नियंत्रणमुक्त हो गई हैं। ऐसे में निजी क्षेत्र के खिलाड़ी भी डीजल की खुदरा बिक्री में उतरेंगे और दाम को लेकर भारी प्रतिस्पर्धा होगी। इस माहौल में वही कंपनी टिक पाएगी जिसकी शोधन लागत कम होगी। इसलिए मथुरा रिफाइनरी में तभी विस्तार किया जाएगा जबकि राज्य सरकार इंट्री टैक्स पर अपना रूख स्पष्ट कर देगी। कंपनी के मुताबिक जब हजारों करोड़ रुपये का निवेश करें और कर में राहत भी नहीं मिले तो वैसी जगह परियोजना क्यों नहीं लगाई जाए जो रणनीतिक रूप से ज्यादा मुफीद हो और वहां कर की छूट मिले।
उत्तर प्रदेश सरकार ने अभी तक इस पर कोई निर्णय तो नहीं लिया है लेकिन अधिकारियों ने इस मसले पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का संकेत दिया है। अधिकारियों का कहना है कि इस समय राज्य में जो निवेश का माहौल बन रहा है, उसे बनाये रखना है।
--शिशिर चौरसिया--