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नियामक का काम सेंसेक्स चढ़ाना नहीं: रघुराम राजन

Sat, 13 Dec 2014 09:21 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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बैंकिंग क्षेत्र के नियामक रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन का कहना है कि उनका काम शेयर बाजार के संवेदी सूचकांक (सेंसेक्स) को ऊपर चढ़ाना नहीं है बल्कि उसे पूरे अर्थव्यवस्था का ध्यान रखना है।
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उद्योग संगठन फिक्की एवं श्रीराम सेंटर द्वारा शुक्रवार को यहां आयोजित भरत राम स्मारक व्याख्यान को संबोधित करते हुए रघुराम राजन ने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र के नियामक का काम सेंसेक्स को चढ़ाना नहीं है। उसके पास और भी कई महत्वपूर्ण काम हैं। यह कोई प्राथमिक उद्येश्य नहीं है क्योंकि अर्थव्यवस्था की विकास दर को बढ़ाना इससे ज्यादा महत्वपूर्ण काम है। ऐसा माना जा रहा है कि ब्याज दर में कटौती नहीं करने की वजह से केन्द्रीय वित्त मंत्री एवं उद्योग जगत की आलोचना का जवाब देने के लिए उन्होंने ऐसा बयान दिया है।

रिजर्व बैंक के गवर्नर ने कहा कि किसी भी केन्द्रीय बैंक का ध्यान मुद्रास्फीति को रोकने पर रहता है। यदि मुद्रास्फीति की दर कम होगी तो अर्थव्यवस्था के टिकाउ विकास के लिए आदर्श स्थिति होगी। उन्होंने कहा कि वह मुद्रास्फीति के ऐसे न्यूनतम दर का इंतजार कर रहे हैं जो कि भारत की बेहतर विकास दर को सुनिश्चित करे। इस समय चल रहे मेक इन इंडिया कार्यक्रम के बारे में उन्होंने कहा कि इसके साथ ही मेक फोर इंडिया भी महत्वपूर्ण है। यहां विश्व स्तर की ढांचागत सुविधाएं तैयार करनी होगी ताकि यहां कारोबारियों का खर्च घटे।
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विदेशों से आने वाले निवेश (एफडीआई) की राह तके बिना भी निवेश को तीव्र करने का मंत्र देते हुए रघुराम राजन ने कहा कि दुनिया भर में भारतीयों द्वारा शुरू की गई सभी कंपनियां यदि भारत में कारोबार करना शुरू कर दे तो इससे वही परिणाम सामने आएंगे जो कि एफडीआई के निवेश के बाद आते हैं। हालांकि भारत के लिए विदेशी पूंजी जरूरी है लेकिन एफडीआई यदि नई तकनीक या नए तौर-तरीके के क्षेत्र में आए तो यह सोने में सुहागा है।

इसी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा वैश्विक अर्थव्यवस्था के युग में कोई देश कट कर नहीं रह सकता है। हर देश में आज कुछ न कुछ आयात होता है और वहां से कुछ न कुछ निर्यात होता है। एक वैश्विक अर्थव्यवस्था में कुछ चुनौतियां होती हैं तो एक अवसर भी होता है। बेहतर है कि हम चुनौतियों से जूझने में ज्यादा शक्ति न लगा के अवसर को झटकने पर ज्यादा ध्यान दें। इससे राजकोषीय घाटे की समस्या भी दूर हो सकती है।
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