भारतीय बाजार में विदेशी इकाइयों द्वारा पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के जरिए अगस्त माह में निवेश बढ़कर 26 अरब डॉलर (1,41,710 करोड़ रुपए) हो गया। इस साल मार्च के बाद पी-नोट्स के जरिए यह सबसे अधिक विदेशी निवेश है। बाजार नियामक सेबी की ओर से जारी ताजा आंकड़ों के मुताबिक, घरेलू बाजार (इक्विटी, डेट और डेरीवेटिव्स) में पी-नोट निवेश बढ़कर मार्च के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया।
मार्च महीने में पी-नोट्स के जरिए स्थानीय बाजार में 1,65,832 करोड़ रुपए का निवेश हुआ था। पी-नोट्स का ज्यादातर इस्तेमाल एचएनआई (हाई नेटवर्थ व्यक्ति), हेज फंड और अन्य विदेशी संस्थान करते हैं। पी-नोट्स के जरिए इन्हें पहले से पंजीकृत एफआईआई के माध्यम से भारतीय बाजार में अपना पैसा लगाने की अनुमति होती है। पी-नोट्स के जरिए निवेश करने पर विदेशी निवेशकों के सीधे रजिस्ट्रेशन में लगने वाले समय और लागत की बचत होती है।
अगस्त माह में पी-नोट्स से होने वाले एफआईआई निवेश की मात्रा भी बढ़कर 12.7 फीसदी हो गई है। पिछले माह यह 11.8 फीसदी थी। इस साल मार्च में यह सबसे अधिक 15 फीसदी दर्ज की गई थी। कुछ वर्ष पहले तक देश में होने वाले कुछ एफआईआई का 50 फीसदी निवेश पी-नोट्स के जरिए होता था, लेकिन बाजार नियामक सेबी की सख्ती के बाद इसमें गिरावट आ गई। सेबी ने पी-नोट्स के निवेश पर डिस्क्लोजर व अन्य नियामकीय बाध्यताएं लगा दी।