रिजर्व बैंक की अगले सप्ताह होने वाली नीतिगत दरों की समीक्षा के दौरान ब्याज दर में कुछ कमी की सौगात मिल सकती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इसके लिए रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन से खास तौर पर बात की है।
वित्त मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अरुण जेटली का मानना है कि इस समय मुद्रास्फीति की दर नरम पड़ गई है। इसलिए विकास दर को आगे बढ़ाने के लिए ब्याज दरों में कुछ कटौती जरूरी है। बताया जाता है कि इसी उद्देश्य से उन्होंने रिजर्व बैंक के गवर्नर रघुराम राजन से बात भी की है। इसलिए आगामी दो दिसंबर को रिजर्व बैंक की होने वाली नीतिगत दरों की समीक्षा में कुछ कमी हो सकती है।
रघुराम राजन जब पिछले दिनों दिल्ली आए थे, तब कुछ पत्रकारों ने उनसे ब्याज दरों में कटौती के बारे में सवाल किया था। उस समय उन्होंने कहा था कि अभी इसका समय नहीं आया है क्योंकि मुद्रास्फीति की दरों पर लगाम लगाने के लिए वर्तमान ब्याज दर जरूरी है। यदि अभी इसे घटाने का प्रयास किया जाएगा तो हो सकता है कि मुद्रास्फीति की दर फिर से बढ़ जाए। उनका संकेत था कि वर्तमान वित्त वर्ष के अंत तक यदि ब्याज दरों में कटौती की जाए तो ठीक रहेगा।
वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों का कहना है कि खुदरा मुद्रास्फीति की दर अक्बूटर 2014 में गिर कर 5.52 फीसदी तक पहुंच गई है जबकि रिजर्व बैंक ने इसकी दर जनवरी 2015 तक घटा कर 8 फीसदी तक करने का लक्ष्य तय किया था।
मतलब यह है कि इस समय मुद्रास्फीति की दर रिजर्व बैंक के लक्ष्य से कम है तो ब्याज दरों में कमी करने में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। वैसे उद्योग संगठन भी चाहते हैं कि ब्याज दरों में कमी हो। देश के अग्रणी संगठन फिक्की, सीआईआई और एसोचैम ने र्र्कई बार ब्याज दरों में कटौती की मांग की है।