किसान और उनके परिवार के सदस्यों को कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए ज्यादा कर्ज मिलेगा। वित्त मंत्रालय ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को निर्देश दिया है कि वह किसान के परिवार के सदस्यों में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए ज्यादा से ज्यादा कर्ज दें, जिससे कि उनकी तकनीकी कुशलता का विकास हो सके।
सूत्रों के अनुसार वित्त मंत्रालय के साथ हुई क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की बैठक में कहा गया है कि बैंक केवल इस बात पर जोर न दें कि उन्हें केवल कृषि के लिए ही ज्यादा से ज्यादा कर्ज देना है। वह इसके साथ ही किसानों के परिवार के सदस्यों में भी कुशलता को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित करें। इसके तहत यदि कोई सदस्य इलेक्ट्रिक उपकरण रिपेयर करने का काम शुरू करता है, या फिर खेती से जुड़ी दूसरी गतिविधियों में तकनीकी कुशलता बढ़ाने की कोशिश करता हैं, तो आरआरबी उसे कर्ज देकर प्रोत्साहित करें।
हालांकि इस तरह के कर्ज पर कृषि लोन की तरह कोई ब्याज सब्सिडी नहीं मिलेगी। कृषि लोन पर किसानों को समय पर कर्ज चुकाने पर तीन फीसदी तक ब्याज सब्सिडी मिलती है। वित्त मंत्रालय के साथ हुई बैठक में भाग लेने वाले एक बैंकर के अनुसार वित्त मंत्रालय का प्रमुख जोर आरआरबी के जरिये कृषि क्षेत्र और उससे जुड़ी गतिविधियों को ज्यादा कर्ज देना है। इसके लिए मंत्रालय एटीएम के विस्तार, कर्मचारियों की नियुक्ति पर भी जोर दे रहा है। जिसके तहत कहा गया है कि प्रायोजक बैंक की अनुमति से नियुक्तियां भी कर सकते हैं।
इसके अलावा वित्तीय समावेशन के लक्ष्यों को पूरा करने में आरआरबी को भी फोकस बढ़ाने को कहा गया है। नए निर्देश में अब एक हजार से ज्यादा की आबादी वाले गांवों में सभी पात्र लोगों के बैंक खाते खोलने हैं, जिसके तहत अब ग्रामीण इलाकों में कम्यूनिटी सर्विस सेंटर को भी बिजनेस कॉरस्पॉडेंट एजेंट बनने की अनुमति दी गई है। ऐसे में आरआरबी की भूमिका अहम हो जाएगी।