राष्ट्रीय राजमार्गों को मरम्मत के बदले टोल वसूली के लिए निजी क्षेत्र को सौंपना सरकार को खूब रास आ रहा है। पिछले तीन साल में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) करीब 1,500 किलोमीटर के हाईवे के ऑपरेशन, मेंटेनेंस एंड ट्रांसफर (ओएमटी) योजना के तहत मरम्मत के बदले टोल वसूलने के लिए दे चुका है।
यहां हुई उम्मीद से ज्यादा कमाई से उत्साहित सरकार ने देशभर के करीब 3,000 किमी लंबे राजमार्गों की इसी तरह ठेके पर कराने का फैसला किया है। केंद्रीय राजमार्ग एवं सड़क परिवहन मंत्रालय की इस योजना को इंफ्रास्ट्रक्चर पर बनी मंत्रिमंडलीय समिति (सीसीआई) की मंजूरी भी मिल चुकी है।
केंद्रीय राजमार्ग एवं सड़क परिवहन मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में नेशनल हाईवे नंबर 25 और 28 के दो हिस्सों समेत कुल चार ओएमटी परियोजनाओं को ओएमटी के तहत टोल वसूली के लिए दिया जा चुका है। नेशनल हाईवे नंबर 25 के 133 किमी लंबे झांसी-औरेया और नेशनल हाईवे नंबर 28 के 118 किमी के अयोध्या-गोरखपुर सेक्शन को सरकार ओएमटी के तहत टोल वसूली के लिए देने का फैसला कर चुकी है। इनके अलावा राजस्थान और आंध्र प्रदेश में भी कुछ हाईवे ओएमटी के लिए दिए गए हैं।
मंत्रालय के उच्च अधिकारियों का कहना है कि ओएमटी के तहत राजमार्गों की मरम्मत और रखरखाव का काम बेहतर तरीके से हो सकेगा, जिसके बदले निजी क्षेत्र को टोल वसूली का अधिकार दिया जाएगा। इस प्रकार के ठेके चार से नौ साल की अवधि के लिए दिए जाएंगे।
इस दौरान सालाना मरम्मत और समय-समय पर बड़े रखरखाव की जिम्मेदारी टोल वसूलने वाली कंपनी पर होगी। इसके अलावा, वह ट्रैफिक व्यवस्था को भी संभालेगा। सरकार को उम्मीद है कि इससे हाईवे की बेहतर मरम्मत और रखरखाव तो होगा कि साथ ही अच्छा राजस्व मिलेगा। मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार, ओएमटी की पहली छह परियोजनाओं से सरकार को अच्छी कमाई हुई है। गुजरात में नेशनल हाईवे नंबर 14 के एक हिस्से से सरकार को करीब 182 करोड़ रुपये की कमाई हुई है, जबकि अनुमान 65 करोड़ रुपये का था।
टोल के बदले मरम्मत
- 963 किमी की छह परियोजनाएं जारी
- 640 किमी की चार परियोजनाएं हाल में मंजूर
- इस साल कुल 2,998 किमी के हाईवे ओएमटी पर देने की तैयारी