इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी के लिए विदेशी कर्ज जुटाना आसान हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने इस वर्ग के तहत आने वाली गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के मौजूदा नियमों में बदलाव किया है। नए नियम के तहत कंपनियां अब ऑटोमेटिक रूट से ज्यादा कर्ज जुटा सकेंगी। इसके अलावा रिजर्व बैंक ने मुद्रा के जोखिम पर हेजिंग की राशि में भी कमी कर दी है।
रिजर्व बैंक की ओर से जारी नए नियमों के तहत, एनबीएफसी के वर्ग में आने वाली इंफ्रास्ट्रक्चर फाइनेंस कंपनी अपने लिए जुटाई जाने वाली पूंजी का 75 फीसदी तक ऑटोमेटिक रूट से ईसीबी के जरिए जुटा सकेंगी। पहले यह सीमा 50 फीसदी थी। यानी, इतनी राशि के लिए कंपनियों को स्वीकृति लेनी की जरूरत नहीं पड़ेगी।
रिजर्व बैंक ने इसके अलावा विदेशी पूंजी के रूप में कर्ज जुटाने में मुद्रा के जोखिम को देखते हुए हेजिंग की सीमा में भी कमी कर दी है। नई सीमा के तहत कंपनियों को अपने एक्सपोजर का 75 फीसदी ही रखना होगा। पहले यह सीमा 100 फीसदी थी। रिजर्व बैंक के इन कदमों से कंपनियों के लिए सस्ता कर्ज जुटाना आसान हो सकेगा।