वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कृषि क्षेत्र के लिए वित्तीय संसाधन की उपलब्धता में कमी और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं विशेषकर आवास, शौचालय, बिजली, जलापूर्ति और सड़क आदि की कमी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराना लक्ष्य होना चाहिए।
जेटली ने राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा आयोजित राष्ट्रीय गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए कहा कि कृषि एवं ग्रामीण क्षेत्र को लेकर कुछ चुनौतियां हैं, जिनका समाधान किए जाने की जरूरत है। देश की 60 से 65 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की सुविधाओं में भारी अंतर है।
उन्होंने कहा कि हम शहरी क्षेत्रों में किफायती आवास की बात करते हैं लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में सभी को आवास उपलब्ध कराना अतिमहत्वपूर्ण है। हाल के वर्षों में राष्ट्रीय आय में कमी आई है। कृषि क्षेत्र को व्यावसायिक बैंकों से वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराने में भी गिरावट आई है।
ग्रामीणों को आवास, बिजली, शौचालय, सड़क और जलापूर्ति की व्यवस्था करने की जरूरत है। इसके बगैर संतोषजनक परिणाम मिलना संभव नहीं है। नाबार्ड पिछले 32 वर्षों में कृषि एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में काम कर रहा है लेकिन अभी भी इन क्षेत्रों में बहुत कुछ करने की जरूरत है।
वित्तीय सेवाएं विभाग के सचिव जीएस संधू ने कहा कि नाबार्ड ने ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए 1.60 लाख करोड़ रुपये की राशि उपलब्ध करा चुका है और कुछ क्षेत्रों के लिए दोबारा ऋण देने की व्यवस्था भी की गई है। वित्तीय समावेश की दिशा में काम करते हुए नाबार्ड ने 380 में से 340 सहकारी बैंकों को कोर बैंकिंग सोल्यूशन (सीबीएस) से जोड़ा है। ग्रामीण सहकारी बैंकों को इस प्लेटफार्म पर लाने की दिशा में काम चल रहा है। इस मौके पर नाबार्ड के अध्यक्ष डॉ. हर्ष कुमार भानवाला और वित्त सचिव अरविंद मायाराम भी उपस्थित थे।