चुनावी मौसम में महंगाई की आग भड़कने लगी है। गत मार्च में थोक महंगाई तीन महीने में सबसे ज्यादा 5.70 फीसदी रही, जबकि खुदरा महंगाई भी फरवरी के 8.03 फीसदी से बढ़कर मार्च में 8.31 फीसदी हो गई।
थोक और खुदरा दोनों ही मोर्चों पर महंगाई बढ़ने से न सिर्फ आम जनता की जेब पर दबाव बढ़ेगा, बल्कि सस्ते कर्ज की उम्मीदों पर भी पानी फिर सकता है। आर्थिक मुद्दों पर घिरी केंद्र सरकार के खिलाफ विपक्ष को भी एक बड़ा मुद्दा मिल गया है।
खाने-पीने की वस्तुओं की थोक महंगाई
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मार्च में खाने-पीने की वस्तुओं की थोक महंगाई 9.90 फीसदी बढ़ी जबकि फरवरी में इन वस्तुओं पर 8.12 फीसदी महंगाई थी। इस दौरान आलू 27.83 फीसदी, फल 16.15 फीसदी, चावल 12.56 फीसदी और दूध 9.47 फीसदी महंगा हुआ।
अंडा, मांस और मछली पर भी करीब 11 फीसदी महंगाई बढ़ी है। फरवरी में सब्जियों पर सिर्फ 3.99 फीसदी महंगाई थी, जो मार्च में बढ़कर 8.57 फीसदी तक पहुंच गई है।
हालांकि, इस दौरान प्याज, दलहन और खाद्य तेलों के दाम काबू में रहे हैं लेकिन डीजल पर 14.63 फीसदी और एलपीजी की 9.28 फीसदी महंगाई ने आम आदमी का बजट बिगाड़ने में कोई कसर नहीं छोड़ी। थोक मूल्य सूचकांक में करीब 65 फीसदी महत्व रखने वाले फैक्ट्री उत्पादों की महंगाई भी 3.23 फीसदी बढ़ी है।
महंगाई के प्रति नजरिया बदले रिजर्व बैंक
फिक्की के अध्यक्ष सिद्धार्थ बिड़ला का कहना है कि केंद्र में आने वाली सरकार के लिए महंगाई पर काबू पाना पहली प्राथमिकता होना चाहिए।
उन्होंने महंगाई के प्रति रिजर्व बैंक के नजरिए में बदलाव की आवश्यकता भी जताई है। सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी का कहना है कि महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए ब्याज दरों को टूल बनाना उचित नहीं है।
किसकी कितनी रही महंगाई
वस्तु-------थोक महंगाई (मार्च-14)-------थोक महंगाई (फरवरी-14)
आलू-------27.28-------8.36
फल-------16.15-------9.92
चावल-------12.56-------13.65
सब्जियां-------8.57-------3.99
दलहन------- -1.29------- -4.12
खाद्य वस्तुएं-------9.90-------8.12
एलपीजी-------9.28------- -4.09
डीजल-------14.63-------12.78
(आंकड़े फीसदी में)