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तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंची महंगाई दर

Mon, 15 Apr 2013 11:03 PM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
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खाद्य वस्तुओं की कीमत घटने के कारण थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दर तीन साल के न्यूनतम स्तर पर पहुंच चुकी है। महंगाई दर के ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च में मुद्रास्फीति दर 5.96 फीसदी आंकी गई है जो कि फरवरी माह में 6.84 फीसदी पर थी। माना जा रहा है कि महंगाई दर कम होने से आरबीआई ब्याज दरों में कटौती का निर्णय ले सकता है।
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हालांकि थोक मूल्य सूचकांक में गिरावट का तत्काल लाभ आम आदमी को मिलने की संभावना नहीं है। दरअसल आम आदमी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक से ज्यादा प्रभावित होता है। यह अब भी दोहरे अंकों में है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक मार्च में खाद्य वस्तुओं की कीमत  8.73 फीसदी रही है। जबकि इससे पूर्व में यह 11.38 फीसदी थी।

सब्जियों में खासतौर पर प्याज की कीमत पिछले माह के मुकाबले कम रही है। वहीं दूध, अंडा, मछली के दाम भी घटे हैं। हालांकि अनाज की कीमतों में अधिक की गिरावट नहीं आई है। दूसरी ओर मैन्यूफैक्चरिंग क्षेत्र भी महंगाई 4.51 फीसदी से कम हो कर 4.07 फीसदी हो गई है। इंधन, बिजली क्षेत्र में मुद्रास्फीति दर 10.47 फीसदी से घटकर 10.18 फीसदी रही।
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जानकारों का कहना है कि 3 मई को आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा के साथ ब्याज दर में कटौती की घोषणा हो सकती है। लेकिन चालू खाता घाटे में इजाफा आरबीआई के फैसले को प्रभावित भी कर सकती है। महंगाई दर में आई गिरावट से उत्साहित भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने रिजर्व बैंक से एक फीसदी ब्याज दर में कटौती की मांग की है।

सीआईआई का कहना है कि इस कदम से देश में निवेश बढ़ने के साथ औद्योगिक वस्तुओं की मांग में भी इजाफा होगा। जो कि विकास दर में बढ़ोतरी में सहायक होगी।

"भविष्य में महंगाई दर में गिरावट का सिलसिला जारी रहेगा। तीन साल से अधिक समय गुजरने के बाद महंगाई दर का छह फीसदी से नीचे आना काफी महत्वपूर्ण है। प्रत्येक माह आने वाले महंगाई दर के आंकड़ों में उठापटक हो सकती है। लेकिन धीरे-धीरे मुद्रास्फीति का दबाव कम होगा। हालांकि थोक मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के जनवरी के संशोधित आंकड़ों में वृद्धि हुई है। यह 6.62 फीसदी से बढ़कर 7.31 फीसदी हो गई है। मुद्रास्फीति की चाल सरकार के अनुमान के मुताबिक है। यह धीरे-धीरे नियंत्रित होगी।"
- मोंटेक सिंह अहलूवालिया, योजना आयोग के उपाध्यक्ष

"महंगाई दर में नरमी का ट्रेंड आगे भी जारी रहेगा। इससे आरबीआई के लिए भी ब्याज दर में कटौती का निर्णय लेना आसान होगा। इससे औद्योगिक विकास को भी मदद मिल सकेगी।"
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- नैनालाल किदर्वई, फिक्की अध्यक्ष

"हाल के दिनों में महंगाई दर में नरमी मांग में आई कमी की वजह से है। ऑटो बिक्री में आई कमी से मांग में गिरावट का अंदाजा लगाया जा सकता है।"
- एसके मंडल, अर्थशास्त्री
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