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उद्यमियों की पुकार, बजट ऐसा जो डाले लघु उद्यमों में जान

Sun, 24 Feb 2013 12:01 AM IST
नई दिल्ली/संतोष कुमार
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केंद्र सरकार फिलहाल देश का वार्षिक लेखाजोखा तैयार करने में व्यस्त है। कारोबारी हो या नौकरीपेशा, आम आदमी व गृहणियां, हर तबके की सरकार से कुछ अपेक्षाएं हैं। राजधानी के उद्यमी भी चाहते हैं कि उनको बजट राहत दे और बेजान कारोबार में जान पड़े।
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बता दें कि राजधानी में करीब 52 औद्योगिक क्षेत्र हैं। जहां के करीब एक लाख लघु उद्योगों में छह लाख से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। सबसे ज्यादा फैक्ट्री गारमेंट, फर्नीचर, इलेक्ट्रानिक मशीनरी की हैं। राजधानी में जीडीपी में इनका योगदान करीब 17 फीसदी है। इनमें कई आयात इकाइयां हैं, जिन्हें चीन से कड़ी प्रतिस्पर्धा झेलनी पड़ रही है। उद्यमियों का कहना है कि बजट में वित्त मंत्री को लघु उद्योगों के लिए उत्पाद, सेवा व व्यापार कर में छूट देने के साथ विशेष पैकेज का प्रावधान करना चाहिए, जिससे उद्योगों को प्रोत्साहन मिल सके।

'कर ढांचा कुछ इस तरह बनाया जाए, जिससे लघु उद्योगों को फायदा हो। खास तौर से उत्पाद और सेवा कर, जिसकी औसत दर क्रमश: 8-15 फीसदी और पांच फीसदी रखी जाए। वहीं उत्पाद शुल्क में छूट भी बढ़ाकर दो करोड़ की जानी चाहिए।'
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- अनिल गुप्ता, अध्यक्ष, झिलमिल एंड फ्रेंड्स कालोनी सीईटीपी सोसाइटी

'बेशक राज्य सरकारों को एतराज हो, लेकिन वित्त मंत्री को इस साल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) जरूर लागू करना चाहिए। साथ ही कर ढांचा आसान किया जाए, जिससे छोटे व्यापारियों को दलाल और बिचौलियों के चक्कर में न फंसना पड़े।'
- एसके महेश्वरी, महासचिव, पटपड़गंज औद्योगिक क्षेत्र

'इस बार वित्त मंत्री को उत्पाद शुल्क 10 फीसदी अधिकतम तय कराना चाहिए। एक तो मांग कम है वहीं छोटे उद्यमी अपने सौ रुपये के सामान पर 25 रुपये का टैक्स दे रहे हैं। फायदा कुछ भी नहीं है। इसके अलावा आए दिन होने वाली हड़तालों से सरकार को सुरक्षा भी मुहैया करानी चाहिए।'
- एसएन मित्तल, सदस्य, ऑल इंडिया प्लास्टिक मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन

'लघु उद्यमों के लिए प्रतिस्पर्द्धा बढ़ती जा रही है, लेकिन भारी करों से हम विदेशी बाजारों की बराबरी नहीं कर पा रहे। चीन में सरकार रोजगार देने पर छोटे उद्यमों को सब्सिडी तक देती हे, लेकिन यहां उल्टा है। यही वजह है कि दिल्ली की जीडीपी में तेजी से उद्योगों का हिस्सा घटता जा रहा है। वित्त मंत्री को इस बजट में एक ऐसे बोर्ड की संरचना करनी चाहिए, जो लघु उद्यमों को उत्पादों की खरीद सुनिश्चित करे। इससे उत्पादन को प्रोत्साहन मिलेगा।'
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- एसके टंडन, महासचिव, कनफेडरेशन ऑफ दिल्ली इंडस्ट्री
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