ग्रीस संकट और चीन के शेयर बाजार में मचे कोहराम के कारण बुधवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। चीन के शेयर बाजार में तबाही का जो मंजर देखने को मिला उससे उससे भारत भी अछूता नहीं रहा। जहां चीनी मार्केट बुधवार को तीन महीने के लो लेवल पर आ गया, जिसके बाद सरकार को दखल देना पड़ा।
वहीं भारत सहित दूसरे एशियाई देशों के शेयर बाजार में भी गिरावट देखी गई और सेंसेक्स 483.97 अंकों की गिरावट के साथ 27,687.72 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 8400 से नीचे बंद हुआ।
दरअसल चीन में निवेशकों ने ज्यादा रिटर्न के चक्कर में भारी निवेश कर दिया था। इसके लिए उन्होंने निजी तौर पर कर्ज लेकर निवेश किया था। वर्ष 2010 से ही चीनी प्रशासन ने कर्ज लेकर निवेश के नियमों ढील दे रखी है। बाजार जानकारों के अनुसार वहां के कुल निवेश का करीब 85 फीसद निवेश रिटेल निवेशकों ने ही किया है। इस वजह से शेयर बाजार पिछले साल जून से करीब 150 फीसद तक चढ़ गया था।
छोटे शेयरों में भारी उछाल से चिंतित चीनी सरकार ने कर्ज लेकर निवेश के नियमों में को कड़ा कर दिया था। सरकार ने इन नियमों की घोषणा 12 जून को की थी। इसका असर यह हुआ की बाजार में शेयरों में गिरावट देखी जाने लगी। इस कारण कल ट्रेडिंग के दौरान शंगाई और शेंनजेन स्टॉक एक्सचेंजों में करीब 1300 लिस्टेड कंपनियों में ट्रेडिंग पर रोक लगा दी गयी। इससे निवेशकों का करीब 2.4 ट्रिलियन डॉलर डूब गया।
भारत का रुख करेंगे निवेशक
भारतीय बाजार के जानकारों के अनुसार इसका असर भारतीय बाजार पर ज्यादा दिनों तक नहीं चलेगा। हालांकि चाइनीज बाजार में आयी सूनामी का दुनिया के सभी शेयर बाजार पर असर देखा गया।
चाइना दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी इकोनॉमी है और अगर वहां के शेयर बाजार में कुछ भी होगा तो इसका असर उससे जुड़े सभी देशों की इकोनॉमी में पड़ना स्वभाविक है और भारत भी इससे अछूता नहीं है।
बाजार जानकार मानते हैं कि चीन में मार्केट के क्रैश करने के बाद भारत उन चुनिंदा देशों में हो सकता है, जहां विदेशी निवेशक पैसा लगाना चाहेंगे। उनका यह भी कहना है कि चाइनीज मार्केट के क्रैश करने से ग्लोबल मार्केट में कमोडिटी सस्ती हो रही हैं, इससे भी भारत को फायदा होगा।
विदेशी निवेशकों पर असर
चाइना ने हाल ही में विदेशी निवेशकों के लिए स्टॉक्स में निवेश के लिए दरवाजे खोले है। इसमें कुल निवेश का 4 फीसद ही विदेशी निवेश है और वह भी बड़ी कंपनियों तक सिमित है।
बाजार में उठा पटक का असर छोटी कंपनियों के मुकाबले बड़ी कंपनियों पर कम देखने को मिला है। इकॉनोमिस्ट के अनुसार चाइना की इकोनॉमी पर शेयरबाजार का प्रभाव बहुत ही कम है। यह विकसित देशों जहां यह जीडीपी के 100 फीसद के करीब रहता है के मुकाबले केवल तिहाई ही है।
निवेशकों ने ज्यादातर निवेश कर्ज लेकर किया था और इसके भुगतान के बाद ही पता चलेगा की सरकार इस पैनिक को रोकने में नाकाम क्यों रही। इस घटना से ज्यादा असर नहीं पड़ेगा क्योंकि यह पूरे बैंकिंग सिस्टम का 1.5 फीसद ही है।