भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2015-16 के दौरान 6.4 फीसदी की वृद्धि दर हासिल कर सकती है। जबकि वर्ष 2014-15 में विकास दर 5.6 फीसदी रहने की उम्मीद है। दक्षिण एशिया के कुल उत्पादन में भारतीय अर्थव्यवस्था की हिस्सेदारी 80 फीसदी है।
विश्व बैंक ने अपनी साउथ एशिया इकोनॉमिक फोकस रिपोर्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार के सत्ता संभालने से जगी उम्मीदों से आर्थिक गतिविधियों में आई तेजी के चलते भारत को ‘मोदी लाभांश’ का फायदा मिल रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक अगले वर्ष अथवा उसके बाद आर्थिक वृद्धि को अमेरिकी अर्थव्यवस्था में आने वाले सुधार का भी लाभ मिलेगा। इससे भारत से वस्तुओं और सेवाओं के निर्यात को बाजार उपलब्ध होगा।
विश्व बैंक में दक्षिण एशिया के मुख्य अर्थशास्त्री मार्टिन रामा ने कहा कि दक्षिण एशिया के लिए अगले वर्ष के दौरान आउटलुक व्यापक आर्थिक स्थिरता को दर्शाता है। इस दौरान आर्थिक वृद्धि में कुछ तेजी के साथ-साथ राजकोषीय और बुनियादी सुधारों की तरफ झुकाव के लिए संभावित जोखिम भी दिखता है। इस क्षेत्र में भविष्य की वृद्धि काफी कुछ मजबूत निवेश और निर्यात क्षेत्र के प्रदर्शन पर निर्भर करेगी।
रिपोर्ट के अनुसार नई सरकार के सकारात्मक व्यापारिक दृष्टिकोण के चलते निजी क्षेत्र का निवेश भी बढ़ने की उम्मीद है। इसके साथ ही विश्व बाजार में कच्चे तेल के घटते दाम से निजी क्षेत्र की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा। लेकिन, भारत में दीर्घकालिक आर्थिक विकास की क्षमता हासिल करने के लिए आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाना बेहद अनिवार्य है।
रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण एशिया क्षेत्र की अर्थव्यवस्था 2015 में 6 फीसदी की वास्तविक दर से बढ़ेगी। 2016 में यह 6.4 फीसदी की रफ्तार हासिल कर लेगी। वहीं, इस साल क्षेत्र की विकास दर 5.4 फीसदी रहने की उम्मीद है। पूर्व एशिया और प्रशांत क्षेत्र के बाद दुनिया का यह सबसे तेजी से बढ़ता क्षेत्र है। इसमें क्षेत्र के अन्य देशों में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका शामिल हैं।