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अमेरिकी कंपनियों के लिए बाधा खड़ी कर रहा है भारत

Fri, 15 Mar 2013 12:46 AM IST
वाशिंगटन/एजेंसी
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अमेरिका की आईटी और हाईटेक सेक्टर से जुड़ी कंपनियों ने अमेरिकी सरकार से शिकायत की है कि भारत में नई शर्तों और नीतियों के जरिये उनके लिए कारोबारी बाधा खड़ी की जा रही हैं। इन कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले प्रमुख संगठन इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री काउंसिल ने इसे लेकर अमेरिकी नीति नियंताओं के बीच आवाज उठाई है।
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इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री काउंसिल के अध्यक्ष मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) डीन गारफील्ड का कहना है कि एक खुले बाजार (ओपन मार्केट) में उपलब्ध होने वाले अवसरों और देश में ओपन मार्केट के कई सकारात्मक प्रभाव दिखाई देने के बावजूद भारत सरकार विदेशी, खासकर अमेरिकी आईटी व हाईटेक कंपनियों के लिए दरवाजे बंद करने व बाधाएं खड़ी करने जैसे कदम उठाती सी दिखाई दे रही है।

इस संबंध में अमेरिका की एक संसदीय समिति के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराने से पहले उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियों के लिए बाधाएं खड़ी किए जाने के बहुत से उदाहरण मौजूद हैं। भारत में सरकार द्वारा निर्धारित की जा रही नई परीक्षण और प्रमाणीकरण (टेस्टिंग एंड सार्टिफिकेशन) प्रणाली के मानकों व नियमों का जिक्र करते हुए इन्हें अमेरिकी कंपनियों के भारतीय बाजार में आने के लिहाज से बाधक बताया है।
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गारफील्ड ने कहा कि भारत 1996 में हस्ताक्षरितइन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी समझौते (आईटीए) का एक प्रमुख भागीदार व सहयोगी रहा है, पर 1996 के बाद दुनिया अच्छी खासी बदल चुकी है। आज के दौर में कोई भी व्यक्ति हमें 1996 के दौर का मोबाइल या ऐसा कोई अन्य गैजेट हाथ में लिए दिखाई नहीं देगा। इसके बावजूद भारत सरकार उस दौर के आईटी समझौते को अपडेट करके उसी तर्ज पर एक नया आईटीए लाने की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।

उन्होंने कहा कि परेशानी खड़ी करने वाली सबसे बड़ी बात भारत में अपनी तरजीह या प्राथमिकताओं के आधार बाजार में कंपनियों को प्रवेश की इजाजत देने का रुख है, जिसके मुताबिक अगर कोई आईटी उत्पाद भारत में तैयार नहीं किया गया है तो उसे यहां बेचे जाने की अनुमति नहीं होगी।

नई व्यवस्था में शामिल की जा रही इस तरह की शर्तें अमेरिकी कंपनियों समेत सभी विदेशी कंपनियों की राह में बाधा खड़ी करने वाली हैं।

कृषि व डेयरी सेक्टर में संरक्षणवादी उपाय   
अमेरिका के व्यापार कार्यालय के एक पूर्व शीर्ष अधिकारी ने आरोप लगाया है कि भारत कृषि सेक्टर में न केवल संरक्षणवादी उपाय अपना रहा है, बल्कि अमेरिकी डेयरी और मीट उत्पादों पर अनुचित रुकावटें भी लगा रहा है।  

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के पूर्व मुख्य कृषि वार्ताकार एलेन जॉनसन ने कहा कि कृषि के मामले में भारत बहुत ही संरक्षणवादी है। क्योंकि, वह ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राजनीतिक अस्थिरता को लेकर अधिक चिंतित है। भारत में कृषि उत्पादों पर आयात शुल्क बहुत अधिक है। कुछ मामलों में यह दुनिया में सबसे अधिक है।

उन्होंने कहा कि अधिकांश अमेरिकी निर्यातकों को 100 फीसदी तक बाध्यकारी शुल्क देना पड़ता है। भारत का कृषि के प्रति संरक्षणवादी रवैया विशेषकर आयात को मैनेज करने के लिए है। यदि भारत घरेलू खाद्य महंगाई से बचना चाहता है, तो उसे आयात शुल्क में कमी करनी होगी।
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यदि वह घरेलू कीमतों को संरक्षण देना चाहता है तो उसे शुल्क बढ़ाना होगा और भारत यह डब्लूटीओ के बाध्यकारी दायरे के तहत नहीं कर सकता है।
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