एशिया में मझोले आकार की कंपनियां कारोबार बढ़ाने की अपनी क्षमता को लेकर विश्वास से भरी हुई हैं और कंपनियां घरेलू बाजार में विस्तार के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में गतिविधियां तेज होने का इंतजार कर रहीं हैं।
स्टैंडर्ड चार्टर्ड द्वारा किए गए एक स्वतंत्र अध्ययन में यह खुलासा हुआ है। सर्वे चीन, भारत, इंडोनेशिया और मलयेशिया के बाजार में किया गया और इसमें 300 कंपनियों के सीईओ और सीएफओ को शामिल किया गया। सर्वे से पता चलता है कि एशिया की मझोले आकार की कंपनियां क्षेत्र में सुस्त हो रही अर्थव्यवस्थाओं के बावजूद बड़े पैमाने पर आशावादी हैं।
सर्वे के मुताबिक भारतीय कंपनियों के 97 फीसदी सीईओ और सीएफओ अगले पांच वर्ष में अपना कारोबार बढ़ाने की संभावनाओं को लेकर विश्वास से भरे हुए हैं। इन लोगों ने अगले पांच वर्ष में कारोबार में औसतन 54 फीसदी वृद्धि का अनुमान जताया है।
इन कंपनियों का विश्वास बढ़ते मध्य वर्ग के कारण उत्पादों और सेवाओं की मांग से आ रहा है। भारतीय कंपनियों के अधिकारी सबसे ज्यादा आशावादी हैं वहीं मलयेशिया की कंपनियों के अधिकारियों का मिला जुला रूख है। मलयेशिया की 78 फीसदी कंपनियां अपनी ग्रोथ की संभावनाओं को लेकर विश्वास से भरी हुई हैं।
सर्वे के निष्कर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए अच्छी खबर हैं। यहां कंपनियां उत्पादों और सेवाओं की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रहीं हैं। कारोबार बढ़ाने की योजना बनाने वाली 10 कंपनियों में से 8 कंपनियां अगले पांच वर्ष में ज्यादा कर्मचारियों को नियुक्त करने की उम्मीद कर रही हैं।
इससे कर्मचारियों की संख्या में औसतन एक तिहाई का इजाफा होने की उम्मीद है। स्टैंडर्ड चार्टर्ड के साउथ एशिया के एमडी एंड रीजनल हेड, कमर्शियल क्लाइंट्स, मनीष जैन ने कहा कि मझोेले आकार की कंपनियां पूरे एशिया में आर्थिक विकास और नौकरियां पैदा करने के लिए अहम इंजन हैं और ये कंपनियां वैश्विक व्यापार में तेजी से सक्रिय हो रही हैं।