भारत में 2030 तक मूल्य के आधार पर दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा निर्यातक बनने की क्षमता है। एचएसबीसी की ओर से जारी रिपोर्ट के मुताबिक देश में ऑटो के लिए निर्यात हब बनने की क्षमता है और भविष्य में यह अपनी टेक्सटाइल इंडस्ट्री को अच्छी तरह विकसित कर सकता है।
रिपोर्ट में इन उत्साहजनक आंकड़ों के बावजूद निकट अवधि में भारत की विकास दर धीमी रहने का अनुमान जताया गया है। 2014 में विकास दर 5.3 फीसदी रह सकती और 2015 में इसके 6.3 फीसदी पर पहुंचने का अनुमान है। विकास दर की यह रफ्तार 2001-2011 के दरम्यान करीब 8.0 फीसदी रही ग्रोथ से कम है।
एचएसबीसी की रिपोर्ट का कहना है कि विकास की राह में तमाम तरह की बाधाओं के बावजूद मध्यम अवधि में कारोबारी विस्तार दर मजबूत रहेगी। भारत का व्यापार भरोसा सूचकांक 2014 की पहली छमाही में बढ़कर 137 अंक पर पहुंच गया, जो 2013 की पहली छमाही में 126 पर था। निकट अवधि में देखें तो यूरोप सबसे बेहतर कारोबारी गंतव्य और एशिया दूसरे पायदान पर है।
एचएसबीसी इंडिया के एमडी एवं हेड (कामर्शियल बैंकिंग) संदीप उप्पल का कहना है कि भारत के आर्थिक विकास की क्षमता मजबूत है। भारत की बढ़ती आबादी और तेजी से बढ़ रहे मध्य वर्ग के चलते यहां कारोबार की व्यापक संभावनाएं हैं। चीन और अमेरिका को पछाड़कर भारत दुनिया का सबसे बड़ा मध्य वर्ग का बाजार बन सकता है।