देश में निवेश धारणा में सुधार होने के साथ ही चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कारोबारी धारणा मजबूत हुई है और इसमें भारी वृद्धि दर्ज की गई है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) का बिजनेस कांफिडेंस सूचकांक अप्रैल-जून तिमाही में बढ़कर 53.7 अंक पर पहुंच गया है। इससे पिछली तिमाही के यह 49.9 अंक पर था। सूचकांक के 50 अंक से नीचे रहने को कमजोर और इससे ऊपर को सकारात्मक माना जाता है।
नई सरकार के आने के बाद कारोबारी धारणा में हुए इस सुधार का उल्लेख करते हुए सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा है कि स्थिर सरकार के आने से विकास के पटरी पर लाने की उम्मीद जगी है। इसके साथ ही निर्यात में सुधार होने को भी अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर संकेत माना जा रहा है। रुपये में सुधार और महंगाई में नरमी ने भी देश में कारोबारी धारणा को मजबूत बनाने का काम किया है।
सीआईआई के इस सर्वेक्षण में 150 सदस्य शामिल हुए, जिनमें से अधिकांश ने चालू वित्त वर्ष में आर्थिक विकास में तेजी आने, महंगाई पर काबू पाने, राजकोषीय एवं चालू खाता घाटा को नियंत्रण में रखने के साथ ही डॉलर की तुलना में रुपये में सुधार की उम्मीद जताई है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि विकास दर पिछले वित्त वर्ष के 4.7 फीसदी से बढ़कर चालू वित्त वर्ष में 5.5 से 6 फीसदी के बीच रह सकती है। इस दौरान महंगाई 6 फीसदी से नीचे 5.5 फीसदी तक आ सकती है।