भारतीय उद्योग जगत की आय में बढ़ोतरी (रिवेन्यू ग्रोथ) की रफ्तार चालू वित्त वर्ष (2014-15) की दूसरी तिमाही में कुछ धीमी रहने के आसार रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने जताए हैं। क्रिसिल के मुताबिक जुलाई-सितंबर तिमाही में रिवेन्यू ग्रोथ 9 से 10 फीसदी के दायरे में रह सकती है। अप्रैल-जून तिमाही में 13 फीसदी पर रही थी। रिपोर्ट में इस कमजोरी की वजह निर्यात बढ़ने में आई सुस्ती और निवेश के क्षेत्र में आई कमजोरी को बताया गया है।
रिपोर्ट में कंपनियों की लाभदेयता (प्रॉफिटेबिलिटी) के मामले में सालाना आधार पर 0.5 फीसदी की बढ़त ही हासिल होने की बात कही गई है। क्रिसिल की यह रिपोर्ट विभिन्न क्षेत्रों की 600 कंपनियों के विश्लेषण पर आधारित है। भारतीय उद्योग जगत के कुल पूंजीकरण में इन कंपनियों की करीब 71 फीसदी की हिस्सेदारी है। हालांकि इसमें वित्तीय सेवा क्षेत्र और तेल कंपनियां शामिल नहीं हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि निर्यात आधारित सेक्टरों ने पिछली लगातार पांच तिमाहियों में शानदार प्रदर्शन किया है। जुलाई-सितंबर तिमाही में रुपये में भी सालाना आधार पर करीब 3 फीसदी की मजबूती आई है। रुपये में इस बढ़त का असर निर्यात क्षेत्र के लाभ पर पड़ा है। ऐसे में आईटी क्षेत्र में कारोबार बढ़ने के बावजूद इस क्षेत्र की आय में 12 फीसदी तक की कमी रहने का अनुमान है, जो 8 तिमाहियों में सबसे कम है। इसी तरह दवाओं (फार्मास्यूटिकल्स) क्षेत्र की आय भी सालाना आधार पर घट कर 16.3 फीसदी के मुकाबले 14 फीसदी पर आ जाने का अनुमान है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि चीन में मांग कमजोर रहने का असर भारत के वस्त्र उद्योग पर पड़ा है। इसके चलते सूती वस्त्र बनाने वाली कंपनियों की आमदनी में 9 फीसदी की गिरावट रहने के आसार जताए गए हैं। इसके विपरीत ऑटो सेक्टर में सुधार दिखने की उम्मीद क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में जताई है। रिपोर्ट के अनुसार गाड़ियों की बिक्री में बढ़ोतरी के चलते ऑटो सेक्टर की आय में बीती तिमाही के दौरान 12 से 14 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज होने की उम्मीद है। इसी तरह तेज खपत वाले उत्पाद (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियों की आय में 15 फीसदी का इजाफा होने की उम्मीद है।
निवेश के माहौल में सुस्ती बने रहने के चलते इससे जुड़े निर्माण (कंस्ट्रक्शन) और पूंजीगत वस्तुओं (कैपिटल गुड्स) जैसे क्षेत्रों के प्रदर्शन में कमजोरी बने रहने की आशंका क्रिसिल की रिपोर्ट में जताई गई है। हालांकि इस कमजोर धारणा के बावजूद सीमेंट उद्योग की आय में सालाना आधार पर 15 से 17 फीसदी की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। इसकी वजह सीमेंट कंपनियों के कारोबार में तेजी नहीं, बल्कि पिछले साल की दूसरी तिमाही के खराब प्रदर्शन की तुलना में इस बार सीमेंट कंपनियों का प्रदर्शन स्थिर रहना बताया गया है।