मानसून खासकर दक्षिण पश्चिमी मानसून की कमजोर स्थिति के बावजूद हाल के वर्षों में कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन का ग्राफ बेहतर हुआ है और खाद्यान्न उत्पादकता में बढ़ोतरी हुई है।
पीएचडी चैम्बर की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तवर्ष 2010 से 2012 तक मानसून में औसतन 6.5 फीसदी की कमी दर्ज की गई। इसके बावजूद उत्साहजनक तथ्य यह है कि कृषि और उससे संबंधित सेक्टर की वृद्धि दर में इजाफा हुआ है। वित्तवर्ष 2007 से 2009 के दौरान कृषि क्षेत्र की विकास दर 3.6 फीसदी रही, जो वित्तवर्ष 2010 से 2012 की अवधि में बढ़कर 3.6 फीसदी हो गई।
खाद्यान्न उत्पादन के मोर्चे पर भी अच्छी खासी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 2007 से 2009 के दौरान औसत खाद्यान्न उत्पादन करीब 22.8 करोड़ टन था, जो 2010 से 2012 की अवधि में बढ़कर करीब 24 करोड़ टन पर पहुंच गया। खास बात यह है कि प्रमुख वाणिज्यिक फसलों का उत्पादन भी समीक्षाधीन अवधि में करीब 164 करोड़ टन से बढ़कर 168.3 करोड़ टन हो गया।
पीएचडी चैम्बर के प्रेसिडेंट संदीप सोमानी का कहना है कि हाल के वर्षों में कृषि सेक्टर में आई मजबूती खाद्य सुरक्षा की ओर सरकार का ध्यान खींच रही है। सरकार ने इस ओर गंभीरता से पहल शुरू की है। सरकार की ओर से कृषि सेक्टर को छोटे किसानों, भूमिहीनों और कृषि मजदूरों के लिए मुनाफे का उद्यम बनाने के लिए कई तरह के नीतिगत सुधार किए गए हैं। यह निश्चित तौर पर खेती को प्रोत्साहित करने की कारगर पहल है।