कोल्ड ड्रिंक्स पीने को लेकर बच्चों की जिद पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को चिंता जताई है। सर्वोच्च अदालत ने कहा कि कोल्ड ड्रिंक्स पीने से बच्चों को मना किया जाता है, लेकिन इस बारे में वह कभी सुनते नहीं हैं, क्योंकि आजकल सभी क्रिकेटर सॉफ्ट ड्रिंक्स के विज्ञापनों में आते हैं। शीर्षस्थ अदालत ने इस मसले पर केंद्र सरकार से वैज्ञानिक समितियों की कार्यवाही से संबंधित समूचे रिकॉर्ड तलब किए हैं।
जस्टिस केएस राधाकृष्णन व जस्टिस दीपक मिश्रा की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता एनजीओ की ओर से अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने कहा कि कोल्ड ड्रिंक्स के सभी विज्ञापन बच्चों को ध्यान में रखकर बनाए जा रहे हैं। जबकि स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की आशंका पर बच्चों के कोल्ड ड्रिंक्स पीने पर रोक लगाए जाने की जरूरत है।
भूषण की दलील पर जस्टिस राधाकृष्णन ने कहा कि हमें बच्चों को सॉफ्ट ड्रिंक्स पीने से रोकना चाहिए। उन्हें रोका भी जाता है, लेकिन वह सुनते ही नहीं हैं। आजकल सॉफ्ट ड्रिंक्स के विज्ञापनों में सभी क्रिकेटर भी आ रहे हैं। पीठ ने एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन (सीपीआईएल) की ओर से दायर याचिका पर यह टिप्पणी की।
भूषण ने पीठ से कहा कि भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण की तकनीकी समिति इस पूरे मामले में अदालत को गलत राह दिखा रही है। इस पर अदालत ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण को अदालत के निर्देश पर गठित सभी समितियों की कार्यवाही से जुड़े रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया।
वैज्ञानिक समितियों का गठन कर अदालत ने गत वर्ष 8 फरवरी को उन्हें कार्बोनेटेड ड्रिंक्स में केमिकल्स के नुकसानदायक प्रभावों और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर का पता लगाने को कहा था। पीठ ने अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए 3 दिसंबर तक सभी रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश प्राधिकरण को दिया है। याचिका में विशेष समिति से कोल्ड ड्रिंक्स में मिलाए जाने वाले केमिकल्स के नुकसान की जांच कराने को कहा गया है। हालांकि इस पर प्राधिकरण की तकनीकी समिति विचार कर रही है जिसमें कई वैज्ञानिक दल शामिल हैं।